अनुशासनहीनता पर शिक्षा विभाग की कड़ी कार्रवाई
आरोपों की पुष्टि होने पर विभाग ने इसे अनुशासनहीनता, उद्दण्डता और विभागीय निर्देशों की अवहेलना माना। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी मसोधा शैलेन्द्र कुमार को सौंपी गई है, जिन्हें 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में उन्हें ब्लॉक संसाधन केंद्र मसोधा से संबद्ध किया गया है और नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया।
वहीं दूसरे मामले में पूर्व माध्यमिक विद्यालय पीठापुर, शिक्षा क्षेत्र तारून में तैनात सहायक अध्यापक अम्बिका प्रसाद को भी निलंबित किया गया है। जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण के बाद प्रधानाध्यापक सुरेन्द्र प्रसाद ने 2 जुलाई 2025 को कार्यभार ग्रहण कर
लिया था, लेकिन इसके बावजूद अम्बिका प्रसाद ने कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद प्रभार नहीं सौंपा। इससे विद्यालय के संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही थी। खंड शिक्षा अधिकारी तारून यशवंत कुमार द्वारा लिखित और मौखिक निर्देशों के बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया गया। विभाग ने इसे अनुशासनहीनता, हठधर्मिता और कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही माना। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर अम्बिका प्रसाद को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी सोहावल रविता राव को सौंपी गई है, जिन्हें 21 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में उन्हें ब्लॉक संसाधन केंद्र सोहावल से संबद्ध किया गया है और नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। दोनों मामलों में हुई कार्रवाई से साफ है कि शिक्षा विभाग अब अनुशासनहीनता को लेकर कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

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