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16448 सहायक अध्यापक नियुक्ति का मामला : बीटीसी 2013 बैच के अभ्यर्थियों का मूल्यांकन ग्रेडिंग सिस्टम से हुआ

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 16448 शिक्षकों की भर्ती में शासनादेश एवं न्यायालय के साथ ही नए नियम भी बीटीसी 2013 बैच का रास्ता रोक रहे हैं।
दरअसल बीटीसी के प्रशिक्षण में ग्रेडिंग सिस्टम लागू होने के साथ ही कई नियम 2013 बैच से लागू हुए हैं इससे उस बैच के प्रशिक्षुओं की दावेदारी पर भर्तियों के नियम-निर्देश भी बदलने होंगे। यही नहीं 2013 बैच के आने पर 15 हजार शिक्षक भर्ती के बचे अभ्यर्थी बाहर ही रह जाएंगे। साथ ही भर्ती प्रक्रिया भी लंबे समय तक चलाना मजबूरी होगी।
परिषदीय प्राथमिक स्कूलों के लिए नई शिक्षक भर्ती की घोषणा होते ही उसमें शामिल होने वालों को लेकर मंथन तेज हो गया है। इसमें सबसे अधिक चर्चा बीटीसी 2013 बैच को लेकर हो रही है, क्योंकि इसी बैच से बीटीसी के कई नियमों में बदलाव हुआ है। बीटीसी 2012 तक गुणांक की गणना अलग तरीके से होती रही है, जबकि 2013 से ग्रेडिंग शुरू हो गई। इससे यह अंतर आया है कि बीटीसी प्रशिक्षण प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी से उत्तीर्ण करने वालों को तय मानक के अनुरूप अंक मिलते थे, जबकि ग्रेडिंग में 60 प्रतिशत से कम अंक पाना वाला फेल हो जाता है।
यही नहीं ग्रेडिंग के अंक व पुरानी प्रणाली के अंकों में भी अंतर है। नई प्रणाली में ए ग्रेड को 10, बी को आठ व सी को छह अंक दिए जाते हैं। वहीं पुरानी प्रणाली से प्रथम श्रेणी को 12, द्वितीय को नौ एवं तृतीय श्रेणी को तीन अंक दिए जाते रहे हैं। ऐसे में यदि 2012 व 2013 के अभ्यर्थी किसी भर्ती में एक साथ दावेदारी करेंगे तो उनका मूल्यांकन करना बड़ी चुनौती होगी।
ऐसे ही बीटीसी 2012 बैच तक अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण गृह जिले में होता रहा है इसके लिए उन्हें जिले की वरीयता भी दी जाती है। वहीं, बीटीसी 2013 बैच का चयन प्रदेश स्तरीय मेरिट से हुआ है और प्रशिक्षण गृह जिले के बजाए मेरिट के अनुसार मिले जिले में चल रहा है। ऐसे में सवाल है कि वरीयता किस जिले को दी जाएगी? इसी तरह बीटीसी 2013 बैच के प्रथम बैच का परिणाम जुलाई के पहले हफ्ते में आने की संभावना है, जबकि दूसरा, तीसरा एवं चौथा बैच छह से आठ माह के अंतराल पर पूरा होगा।
यदि एक बैच को मौका मिला तो बाकी दावेदारी करने को कोर्ट की शरण लेंगे जिससे भर्ती की मियाद लगातार बढ़ती जाएगी और वही हाल होगा जिस तरह से 15 हजार शिक्षक भर्ती में बार-बार आवेदन लेने के लिए वेबसाइट खोलनी पड़ी।

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