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टीजीटी में खेल के सवालों से ही खेल, टीजीटी-पीजीटी-2013 के परिणाम घोषित होने के साथ ही गड़े मुर्दे उखड़ने शुरू, शारीरिक शिक्षा विषय के विशेषज्ञ अभ्यर्थियों के कटघरे में

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की टीजीटी-पीजीटी-2013 के परिणाम घोषित होने के साथ ही गड़े मुर्दे उखड़ने शुरू हो गए हैं। विषय विशेषज्ञों को लेकर बोर्ड पर सालों से अंगुलियां उठती रही हैं
और अब शारीरिक शिक्षा विषय में कई प्रश्नों के गलत उत्तरों ने इसे सही भी साबित करना शुरू कर दिया है।
इस विषय में बोर्ड को कई सवाल हटाने पड़े हैं। इसके बावजूद आठ सवाल ऐसे हैं जिनके उत्तर अभ्यर्थी गलत ठहरा रहे हैं। अपने पक्ष में अभ्यर्थियों ने कई पुस्तकों के साक्ष्य भी रखे हैं। 1यह पहला अवसर नहीं है कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को सवालों के गलत विकल्पों को लेकर किरकिरी का सामना करना पड़ा है। इससे पहले भी कई विषयों में ऐसे ही मामलों को लेकर अभ्यर्थी कोर्ट जा चुके हैं और अंतत: परिणाम बदलने तक की नौबत आई है। ताजा मामले में खेल के कुछ सामान्य सवालों को लेकर भ्रम की स्थिति खड़ी हुई है। जैसे कि एक सवाल राजीव गांधी खेल पुरस्कार की राशि से संबंधित है। अभ्यर्थियों का दावा है कि खिलाड़ी को यह पुरस्कार मिलने पर साढ़े सात लाख की धनराशि दी जाती है जबकि बोर्ड ने अपने विकल्प में पांच लाख को सही माना है। अभ्यर्थी विजय पांडेय के अनुसार पहले पांच लाख सही रहा होगा लेकिन, अब इसे बढ़ा दिया गया है। इसी प्रकार क्रिकेट में कितने अंपायर होते हैं? इसके विकल्प को लेकर भी विरोधाभासी स्थिति है। 1इसी तरह सीखना कौन सी प्रक्रिया है, इस सवाल का जवाब अभ्यर्थियों के अनुसार मनोवैज्ञानिक है, जबकि बोर्ड इसका उत्तर व्यावहारिक मानता है। बोर्ड ने टीजीटी में शारीरिक विषय की परीक्षा 171 पदों के लिए कराई थी। अब परिणाम की घोषणा के बाद साक्षात्कार शुरू होने हैं लेकिन, इसके पहले ही विवाद खड़ा हो जाने से मामला कोर्ट तक जाने की आशंकाएं खड़ी हो गई हैं। इस विषय की डी सीरीज की बुकलेट में अभ्यर्थियों को कई अन्य प्रश्न पर सवाल खड़े किए हैं। अभ्यर्थियों का एक समूह बोर्ड के अध्यक्ष को अपनी आपत्तियों से अवगत करा चुका है। अब 14 सितंबर को असंतुष्ट अभ्यर्थी आयोग पर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाने की उनकी योजना है।

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