अंबेडकरनगर : बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी करने वाले बर्खास्त शिक्षकों ने पुलिस अधीक्षक को शपथ पत्र पर अपना बयान दिया है। इसमें उन्होंने बताया है कि आसपास के विभिन्न जिलों में 120 शिक्षक फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे हैं।
आरोपियों ने फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट का खुलासा करते हुए इसके कई जिलों में सक्रिय होने की बात कही है। जिले में फर्जी अभिलेखों के सहारे अन्य कई शिक्षकों के नाम उजागर किए। साथ ही विभिन्न जनपदों में करीब 120 ऐसे ही शिक्षकों के सेवारत होने का राज खोला है। रैकेट के सरगना का नाम भी एसपी को बताया गया है।
विशेष चयन के तहत अनुसूचित जाति के आरक्षण पर भर्ती के दौरान जिले में तैनाती हासिल किए 11 शिक्षकों के अभिलेखों की जांच किए जाने पर एक का जाति प्रमाणपत्र तथा अन्य का शैक्षिक प्रमाणपत्र कूटरचित पाया गया था। ऐसे में तत्कालीन बीएसए दल ¨सगार यादव ने अकबरपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट से गड़बड़ी की शुरुआत को मानते हुए विवेचना हंसवर थाने को स्थानांतरित कर दी गयी। विवेचना के दौरान शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती को लेकर कूटरचना करने वाले रैकेट की ओर इशारा करना शुरू कर दिया है। यह रैकेट विश्वविद्यालय से लेकर महाविद्यालय तथा तहसील प्रशासन में अपनी जड़े जमाए हुए है। यही वजह है कि कूटरचित अभिलेखों के जरिये नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन कराए जाने के दौरान पहली बार यह पकड़ में नहीं आए थे। गोपनीय जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। फिलहाल, पुलिस का शिकंजा कसने के बाद आरोपी शिक्षकों ने भी फर्जीवाड़े के रैकेट तथा फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों का खुलासा करना शुरू कर दिया है। आरोपी बर्खास्त शिक्षक हरि प्रसाद, मंटूराम व सुरेश कुमार ने पुलिस अधीक्षक को नोटरी शपथपत्र देकर बताया कि कोतवाली अकबरपुर के इंद्रलोक कॉलोनी निवासी नामजद युवक ने उन्हें शिक्षक बनाने के लिए पांच-पांच लाख रुपये लिए थे। इसमें शैक्षिक अभिलेखों को कूटरचित तरीके से तैयार किए जाने का खर्चा शामिल था। बताया गया कि आसपास के कई जनपदों में ऐसे कूटरचित अभिलेखों के सहारे 120 लोगों को बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति दिलाई गई है। पड़ोसी जनपद आजमगढ़ में भी करीब दस शिक्षकों को इसी रैकेट ने कूटरचित अभिलेखों के सहारे भर्ती कराया है।
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आरोपियों ने फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट का खुलासा करते हुए इसके कई जिलों में सक्रिय होने की बात कही है। जिले में फर्जी अभिलेखों के सहारे अन्य कई शिक्षकों के नाम उजागर किए। साथ ही विभिन्न जनपदों में करीब 120 ऐसे ही शिक्षकों के सेवारत होने का राज खोला है। रैकेट के सरगना का नाम भी एसपी को बताया गया है।
विशेष चयन के तहत अनुसूचित जाति के आरक्षण पर भर्ती के दौरान जिले में तैनाती हासिल किए 11 शिक्षकों के अभिलेखों की जांच किए जाने पर एक का जाति प्रमाणपत्र तथा अन्य का शैक्षिक प्रमाणपत्र कूटरचित पाया गया था। ऐसे में तत्कालीन बीएसए दल ¨सगार यादव ने अकबरपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट से गड़बड़ी की शुरुआत को मानते हुए विवेचना हंसवर थाने को स्थानांतरित कर दी गयी। विवेचना के दौरान शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती को लेकर कूटरचना करने वाले रैकेट की ओर इशारा करना शुरू कर दिया है। यह रैकेट विश्वविद्यालय से लेकर महाविद्यालय तथा तहसील प्रशासन में अपनी जड़े जमाए हुए है। यही वजह है कि कूटरचित अभिलेखों के जरिये नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन कराए जाने के दौरान पहली बार यह पकड़ में नहीं आए थे। गोपनीय जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। फिलहाल, पुलिस का शिकंजा कसने के बाद आरोपी शिक्षकों ने भी फर्जीवाड़े के रैकेट तथा फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों का खुलासा करना शुरू कर दिया है। आरोपी बर्खास्त शिक्षक हरि प्रसाद, मंटूराम व सुरेश कुमार ने पुलिस अधीक्षक को नोटरी शपथपत्र देकर बताया कि कोतवाली अकबरपुर के इंद्रलोक कॉलोनी निवासी नामजद युवक ने उन्हें शिक्षक बनाने के लिए पांच-पांच लाख रुपये लिए थे। इसमें शैक्षिक अभिलेखों को कूटरचित तरीके से तैयार किए जाने का खर्चा शामिल था। बताया गया कि आसपास के कई जनपदों में ऐसे कूटरचित अभिलेखों के सहारे 120 लोगों को बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति दिलाई गई है। पड़ोसी जनपद आजमगढ़ में भी करीब दस शिक्षकों को इसी रैकेट ने कूटरचित अभिलेखों के सहारे भर्ती कराया है।
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