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इलाहाबाद हाईकोर्ट के डबल बेंच के आदेश के क्रम में समायोजित शिक्षामित्रों को भी पुनः अपना समायोजन बचाने व पार्टी बनने के लिए, सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल अपील जरुर योजित करनी चाहिए

जैसा कि दिनांक - 30 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज श्री दिलीप गुप्ता व जज श्री जयंत बनर्जी की पूर्ण पीठ ने ऐसे शिक्षकों को सेवा से हटाने करने का आदेश दिये हैं जिनका टीईटी प्रमाण पत्र प्रशिक्षण पूर्ण होने के पहले
का हैं, उक्त आदेश से टीईटी -2011 से लेकर अब जितने भी अभ्यर्थी प्रशिक्षण पूर्ण हुए टीईटी का प्रमाण पत्र प्राप्त करके नौकरी प्राप्त की है, या अवैध ढंग से हथियाई हैं, सभी पर संकट आया हुआ है.

और अग्रिम नियुक्ति 68,500/- में भी लगभग 10,000/- प्रभावित हो रहे हैं, जो नियुक्ति से वंचित होना सुनिश्चित है, जहां तक सुप्रीम कोर्ट से उक्त निर्णय से राहत मिलने की बात है, वह सम्भावनाएं अति न्यून है, क्योंकि कि यह निर्णय विधि सम्मत हैं, जब आपका प्रशिक्षण पूर्ण ही नहीं है तो, टीईटी प्रमाण पत्र, कहां से वैध हो सकता है?
यदि माना उक्त अवैध पीड़ित अभ्यर्थियों को मानवीय आधार पर, सुप्रीम कोर्ट राहत देती है तो, 137000/- समायोजित शिक्षकों ( शिक्षामित्रों को भी मानवीय आधार पर पुनः समायोजन बहाली का आदेश हो सकता है

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