उत्तर प्रदेश में शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एनसीटीई के 11 फरवरी 2011 के सर्कुलर के क्लॉज 5 (2) के तहत निर्धारित योग्यता के बिना टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट उत्तीर्ण सहायक अध्यापकों की जांच कर सेवा से हटाने की कार्यवाई करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता एवं न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने प्रभात कुमार वर्मा व दर्जनों अन्य की विशेष अपीलों पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे व आरके ओझा, अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी व विभू राय को सुनकर यह आदेश दिया है और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए है कि अयोग्य शिक्षकों की तुरन्त जांच कर उनके खिलाफ कार्यवाही करे।
खंडपीठ ने एकलपीठ के उस फैसले को संशोधित कर कहा था कि इस मामले में याची प्रत्यावेदन दें और बीएसए कार्यवाही करे। आपको बतादें कि मानव संसाधन मंत्रालय ने 8 नवम्बर, 2010 में सभी राज्य सरकारों को लेटर लिखा था।
इसमें साफ कहा गया था कि टीईटी पास करने की अनिवार्यता से छूट केन्द्र सरकार नहीं देगी क्योंकि टीईटी पास करना न्यूनतम योग्यताओं में आता है। इसलिए इसका पालन करना जरुरी है।
बतादें कि कि शिक्षामित्रों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक पद पर नियुक्त करने की प्रक्रिया रद्द करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि बिना टीईटी उत्तीर्ण किए उम्मीदवार को शिक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकता।
सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों के खिलाफ टीईटी पास उम्मीदवारों ने कोर्ट में याचिका डाली थी। उनका कहना था कि सरकार अयोग्य लोगों को सहायक शिक्षक नियुक्त कर रही है।
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