इलाहाबाद : सिपाही भर्ती 2015 में अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी का चयन न
करके कम अंक पर चयन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। विज्ञापन में दिए गए
प्रारूप के अनुसार प्रमाणपत्र न देने वाले अभ्यर्थियों का पुलिस भर्ती
बोर्ड ने चयन नहीं किया है।
इसके खिलाफ अभ्यर्थी कविता मौर्या की याचिका पर
सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने प्रदेश सरकार से
जानकारी मांगी है। मामले की सुनवाई अब 10 जुलाई को होगी। 1याची के अधिवक्ता
सुनील यादव का कहना था कि याची ने महिला कांस्टेबल के लिए आवेदन किया था।
उनका कटऑफ अंक 412.9 था, जबकि चयन की अंतिम कटऑफ मेरिट 410.6 अंक थी। इसके
बावजूद याची का चयन नहीं किया गया। सरकार ने अधिवक्ता का कहना था कि याची
ने विज्ञापन में दिए गए प्रारूप के अनुसार जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं
किया, इसलिए उसे चयन में शामिल नहीं किया गया। 1याची के अधिवक्ता की दलील
थी कि इस मामले में सरकार ने दोहरा मापदंड अपनाया है। विज्ञापन में दिया
गया प्रारूप पुराना है, जो मैनुअली बनाया जाता था। अब सरकार ने खुद इस
प्रारूप पर जाति प्रमाणपत्र देना बंद कर दिया है। नए प्रमाणपत्र
ई-डिस्टिक्ट से ऑनलाइन जारी किया जाता है। याची को जैसा प्रमाणपत्र दिया
गया है वह वैसा ही प्रस्तुत कर सकती है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश
सरकार को अगली सुनवाई पर स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है।’
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