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UP board exam: शासन का आदेश नहीं मान रहे यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन कर रहे शिक्षक

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन कर रहे शिक्षक शासन का आदेश नहीं मान रहे हैं। मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय और बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने सभी डीआईओएस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि मूल्यांकन कार्य में लगे किसी भी व्यक्ति द्वारा मूल्यांकन के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल किसी भी दशा में न किया जाए।

मूल्यांकन संबंधी किसी भी प्रपत्र (ओएमआर शीट, मूल्यांकित उत्तर पुस्तकों के किसी भी पृष्ठ) की फाटो मोबाइल से न खींची जाए। यदि कोई भी परीक्षक या कर्मचारी इस आदेश का पालन नहीं करता तो उसके कृत्य को विश्वासघात की श्रेणी में माना जाएगा और उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई (अर्थदंड या परीक्षा कार्यों से वंचित करने की कार्रवाई) की जाएगी। लेकिन अधिकांश परीक्षक इस आदेश को नहीं मान कर विश्वासघात कर रहे हैं।
पिछले साल गोपनीय अवार्ड ब्लैंक और कॉपियों की फोटो व्हाट्सएप पर वायरल होने की घटना से सतर्क बोर्ड सचिव ने केंद्रों पर परीक्षकों द्वारा मोबाइल नहीं रखने सख्त निर्देश दिए थे।
शिक्षकों के मोबाइल रखने पर रोक है। शिक्षकों से अनुरोध करने पर कुछ लोग मान जाते हैं लेकिन अधिकांश शिक्षक मोबाइल छोड़ना नहीं चाहते। कुछ शिक्षक छिपाकर अपने साथ ले जाते हैं। -डॉ. योगेश चन्द्र त्रिपाठी
प्रधानाचार्य भारत स्काउट एंड गाइड इंटर कॉलेज
  
मुख्य सचिव ने मूल्यांकन केंद्रों पर शिक्षकों के मोबाइल नहीं रखने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद यदि शिक्षक मोबाइल लेकर कॉपी जांच रहे हैं तो यह गंभीर विषय है। यदि कोई शिकायत करता है तो शासन से कार्रवाई की संस्तुति करेंगे।

-नीना श्रीवास्तव, सचिव यूपी बोर्ड

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