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मृतक आश्रित नियुक्ति से इनकार मनमाना, आर्थिक स्थिति पर विचार अनिवार्य: हाईकोर्ट

 प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो, तो केवल तकनीकी आधार पर मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति से इनकार करना मनमाना है। कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया।

मामला क्या था

याचिकाकर्ता दीपक कुमार के पिता नगर निकाय में सफाईकर्मी के पद पर कार्यरत थे, जिनकी सेवाकाल में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार की आजीविका चलाने के लिए उनकी मां को भी मजबूरी में सफाईकर्मी के रूप में कार्य करना पड़ा, लेकिन विषम परिस्थितियों के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बावजूद अधिकारियों ने मृतक आश्रित कोटे में पुत्र की नियुक्ति से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कहा कि इस तरह के मामलों में निर्णय लेते समय नियमावली के उद्देश्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए, न कि केवल तकनीकी कारणों को। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतक आश्रित नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को आर्थिक संकट से उबारना है।

परिवार की आर्थिक स्थिति सर्वोपरि

हाईकोर्ट ने कहा कि जब पिता की सेवाकाल में मृत्यु हो चुकी हो और मां भी मजबूरी में नौकरी छोड़ चुकी हो, तब परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर विचार किए बिना नियुक्ति से इनकार करना न्यायसंगत नहीं है।

तीन सप्ताह में निर्णय का निर्देश

कोर्ट ने अधिशासी अधिकारी को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता की मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर पुनः विचार कर तीन सप्ताह के भीतर उपयुक्त आदेश पारित करें।

यह फैसला मृतक आश्रित नियुक्ति से जुड़े मामलों में मानवीय दृष्टिकोण और नियमों के उद्देश्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नज़ीर माना जा रहा है।

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