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🔴 TET अनिवार्यता समाप्त करने की मांग: 25 लाख शिक्षकों के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री से TFI की अहम वार्ता

 नई दिल्ली। देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षकों के लिए टेट (TET) की अनिवार्यता समाप्त कराने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर टीचर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (TFI) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से विस्तृत एवं निर्णायक वार्ता की। यह बैठक संसद भवन स्थित मंत्री के पार्लियामेंट कार्यालय में आयोजित हुई, जिसमें शिक्षकों से जुड़े संवेदनशील विषयों पर गहन संवाद हुआ।

सांसद जगदंबिका पाल ने मजबूती से रखा शिक्षकों का पक्ष

इस अहम वार्ता में सांसद जगदंबिका पाल ने शिक्षकों की समस्याओं को अत्यंत दमदारी, तथ्यात्मकता और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर टेट जैसी शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है और इससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है।

TFI ने रखीं राष्ट्रीय स्तर की शिक्षकीय समस्याएं

TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने देशभर के शिक्षकों की ओर से टेट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को विस्तारपूर्वक रखते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति (NEP) के बाद कई व्यावहारिक और संवैधानिक विसंगतियां सामने आई हैं। उन्होंने पूर्व में लागू सेवा शर्तों और वर्तमान नियमों के बीच विरोधाभास की ओर भी मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया।

संवैधानिक, न्यायसंगत और भावनात्मक पहलुओं पर चर्चा

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह विषय केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है। वार्ता के दौरान संवैधानिक, व्यावहारिक, न्यायसंगत एवं भावनात्मक सभी पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का सकारात्मक आश्वासन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा तथा यथाशीघ्र उचित निर्णय लेने का प्रयास होगा। मंत्री की प्रतिक्रिया शिक्षकों के लिए संतोषजनक और प्रेरणादायक मानी जा रही है।

अन्य पदाधिकारी भी रहे मौजूद

इस अवसर पर फेडरेशन के उपाध्यक्ष शंकरलाल त्रिपाठी एवं मेहताब भाई भी उपस्थित रहे। अंत में टीचर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया की ओर से केंद्रीय मंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए देश के शिक्षक समुदाय के हित में शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया गया।

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