कों को TET से *छूट* प्रदान की गई थी। यह छूट स्थायी प्रकृति की थी, किंतु सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्थायी मानते हुए मात्र दो वर्ष की समय-सीमा थोप दी। यह छूट छीनना न केवल लाखों शिक्षकों के अधिकारों का हनन है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और अनुभवी शिक्षकों के सम्मान पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
*अब समय है एकजुट संघर्ष का*
यह स्पष्ट है कि केवल अदालतों के दरवाजे पर ही नहीं, बल्कि *सड़क से संसद तक* *न्यायपालिका से कार्यपालिका तक* एकजुट, सशक्त और निरंतर संघर्ष के माध्यम से ही इस अन्याय को दूर किया जा सकता है।
हमारी मांगें स्पष्ट और न्यायसंगत हैं:
1. *NCTE अधिसूचना 23 अगस्त 2010* में दी गई TET छूट को *पुनः स्थायी* रूप से बहाल किया जाए।
2. सितंबर 2027 की कृत्रिम समय-सीमा को *पूर्णतः समाप्त* किया जाए।
3. 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी सेवारत शिक्षकों को *TET की अनिवार्यता से स्थायी मुक्ति* प्रदान की जाए।
4. शिक्षकों की *सेवा सुरक्षा* को संवैधानिक संरक्षण दिया जाए, क्योंकि शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) तभी सार्थक होगा जब शिक्षक स्वयं सुरक्षित और सम्मानित हों।
*एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है*
जब तक हम बिखरे हुए हैं, तब तक अन्याय हमें कुचलता रहेगा।
जब हम एक होंगे — एक स्वर में, एक संकल्प के साथ — तो यह अन्यायपूर्ण बंधन टूटकर चूर-चूर हो जाएगा।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें:
*"हम अपनी सेवा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।"*
*शिक्षक एकता जिंदाबाद!*
*शिक्षकों का न्याय होगा!*
*समादर की भावनाओ सहित*
_विनय पांडेय "जिला अध्यक्ष"_
_सत्य प्रकाश वर्मा "जिला मंत्री"_
_वीरेंद्र प्रताप सिंह "जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष"_
_अंकित श्रीवास्तव "जिला संयुक्त मंत्री"_
_सुनील दत्त शुक्ला "जिला कोषाध्यक्ष"_
_हरीश कुमार "जिला उपाध्यक्ष"_
_*उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ श्रावस्ती*_
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