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वेतन रोकने व बहाल करने के खेल पर बीईओ फंसे

फर्रुखाबाद, जागरण संवाददाता : शिक्षकों की अनुपस्थिति व विद्यालयों में कमियां पाए जाने पर हेडमास्टर व शिक्षकों के खिलाफ वेतन रोकने, वेतन काटने व अन्य प्रशासनिक कार्रवाई के द्वारा कागजी पेट तो भर लिया जाता है।
लेकिन कमियां दूर हुए बिना ही खंड शिक्षा अधिकारी कुछ दिन बाद कार्रवाई वापस लेने की सिफारिश भेज देते हैं। इसमें लेन देन के आरोप भी लगते हैं। इस खेल की भनक वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची है। खंड शिक्षा अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है कि आखिर किसी आधार पर अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई को निरस्त करने की आख्या भेजी गयी।
खंड शिक्षा अधिकारियों को हर माह कम से कम 20 विद्यालयों का निरीक्षण करना होता है। शासन को यह रिपोर्ट भी भेजनी पड़ती है कि निरीक्षण में शिक्षकों की अनुपस्थिति व विद्यालय में पाई गई कमियों के लिए कितने शिक्षकों पर वेतन रोक, वेतन कटौती, वेतन वृद्धि रोकने, वेतन वृद्धि घटाने व निलंबन आदि की कार्रवाई की गई। निरीक्षण रिपोर्ट में तो कार्रवाई कर दी जाती है लेकिन शिक्षकों के सम्पर्क करने पर कुछ दिन में ही कार्रवाई समाप्त करने की सिफारिश बीएसए को भेज दी जाती है। इसके बाद शिक्षक मुख्यालय पर आदेश जारी कराने को डेरा जमा लेते हैं। यही वजह है कि न नियमित उपस्थिति हो रही है, न गुणवत्ता सुधार।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप चौधरी ने बताया कि इस संबंध में सभी बीईओ से तीन दिन में जवाब तलब किया गया। परिषद सचिव को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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