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पांच साल से बेसिक शिक्षा विभाग में चली आ रही सबसे बड़ी मुकदमेबाजी का हुआ अंत, सपा सरकार में तीन तरह के नियमों से हुई थी शिक्षक नियुक्तियां, लाखों लोगों की नौकरियां बनी रही दांव पर

इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता: यूपी में पांच साल से चले आ रहे शिक्षक भर्ती के सभी विवादों का सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अंत कर दिया।
पांच साल में 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन बिना टीईटी हुआ जबकि
99 हजार सहायक अध्यापकों को एकेडमिक मेरिट पर नियुक्ति मिली। 66 हजार से अधिक प्रशिक्षु शिक्षकों को टीईटी मेरिट पर नियुक्त किया गया।एक अप्रैल 2010 को नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ और एनसीटीई ने शिक्षक भर्ती के नियम तय कर दिए। यूपी में पहली बार आयोजित शिक्षा पात्रता परीक्षा से ठीक चार दिन पहले तत्कालीन बसपा सरकार ने 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती टीईटी मेरिट करने संबंधी नियमावली में संशोधन किया लेकिन तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन की गिरफ्तारी के बाद सपा सरकार ने जांच कराई और एकेडमिक मेरिट पर शिक्षकों की भर्ती का फैसला किया।

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