राज्य सरकारों की राजनीति में फंसा देश का हर शिक्षामित्र

राज्य सरकारो की राजनीत में फसा शिक्षामित्र अपनों की राजनीत का शिकार हुआ है आम शिक्षामित्र अपने आप मर रहा है और उसके नेता आलीशान गाडियो में घूमते है और सत्ता में सीधा सम्पर्क रखते है। सभी शिक्षामित्रो पर राजनीत कर रहे है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश श्री आदर्श गोयल एवं यु यु ललित द्वारा RTE के धारा 21 A को आधार बनाते हुये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक के रूप मे समायोजन को निरस्त करते हुये खुला भर्ती के माध्यम से चयनित होने का निर्देश दिया है। परिणाम स्वरुप 136000 समायोजित अध्यापक सड़क पर हो गये।
RTE ACT के अन्तर्गत NCTE नोटीफिकेशन 23-8-2010
के पैरा 4 में TET छूट प्राप्त शिक्षकों का ब्यूरा
3 सितम्बर 2001से 23/8/2010 के मध्य नियुक्त शिक्षक।
3सितम्बर 2001 से 23/8/2010 मध्य नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षक।
3 सितम्बर2001से23/8/2010 के मध्य Bed/LT डिग्री धारी शिक्षक।
  इस पैरा मे शिक्षा मित्रों को नही माना गया जब कि इस अवधि के सभी  शिक्षकों को tet से छूट प्रदान है। लेकिन पैराटीचर को माना गया है जो की (पूर्व में स्नातक पास शिक्षामित्र थे।) जिनकी सख्या NCTE 124000 ही बताता है। अधिनियम के पैरा 12A में किसी भी स्रोत और नाम से नियुक्त शिक्षण कार्य करने वाले को शिक्षक माना गया है। जो लोग 23 /8/2010 से पहले स्नातक नही थे उन्हें TET से छूट नही मिल सकती और उन्हें खुली भर्ती में आना होगा। ऐसे लोगो को कुछ आरक्षरण दिया जा सकता है।
अप्रशिक्षित अध्यापक ( शिक्षा मित्र) माने गये है स्नातक पास शिक्षामित्र 23/8/2010 से पहले स्नातक पास लेकिन आप सभी के नेताओ को यह भारत सरकार का आदेश पसंद नही आया और कह दिया यह मायावती जी का आदेश है यह गलत है फिर अखिलेश जी की सरकार के नियम अपनी मर्जी से बनवा लिए उसी का यह नतीजा है समायोजन नही तो कोई जान भी नही पाता और आज प्रधानाध्यापक की तैयारी कर रहे होते जो अवशेष रह गए थे वह भी अध्यापक की लाइन होते  31/3/2019 तक प्रशिक्षित अध्यापक बन जाते। हो सकता है कुछ लोगो की समझ में न आया हो या बात अच्छी न लगी हो हमे कोई फर्क नही पड़ता है सत्य लिखने का प्रयास करता हूँ।

देवेन्द्र प्रताप सिंह कुशवाहा जलालाबाद-शाहजहाँपुर 9935161356
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