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अब विश्वविद्यालय अपनी मर्जी से शुरू नहीं कर सकेंगे कोर्स, डिग्री बहाली का मिलेगा मौका, जून में परीक्षा

नई दिल्ली : विश्वविद्यालय या कोई भी संस्थान अब अपनी मर्जी से कोई भी कोर्स नहीं शुरू कर सकेंगे। इन्हें किसी कोर्स को चालू करने से पहले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की मंजूरी लेनी होगी।
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों या उच्च शिक्षण संस्थानों में बगैर मंजूरी के चल रहे ऐसे सभी कोर्सो को अमान्य करार देते हुए इन्हें तत्काल बंद करने की सलाह दी है।1यूजीसी ने हाल ही में कुछ चुनिंदा विश्वविद्यालय और डीम्ड संस्थानों की कराई गोपनीय जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह निर्देश दिया है। इसमें पता चला है कि देश के कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों में यूजीसी की मंजूरी बिना भी कुछ कोर्सो का संचालन किया जा रहा है।1सूत्रों की मानें तो यूजीसी ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। हालांकि यूजीसी सख्ती दिखाती, इससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने चार डीम्ड संस्थानों के इंजीनियरिंग कोर्स को अवैध ठहराते हुए उनकी सभी डिग्रियों को अमान्य करार दे दिया था। ये संस्थान यूजीसी की अनुमति बगैर दूरस्थ शिक्षा के तहत इंजीनियरिंग कोर्स को चला रहे थे। इसके बाद यूजीसी में हड़कंप मच गया। इसी बीच यूजीसी के सामने अंबेडकर विश्वविद्यालय में संचालित हो रहे कुछ ऐसे कोर्सो की रिपोर्ट भी सामने आई। इस पर यूजीसी ने देश भर के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी कर बिना मंजूरी संचालित किए जा रहे कोर्सो को तत्काल बंद करने को कहा है।

दूरस्थ शिक्षा से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले छात्रों को फिलहाल एआइसीटीई ने अपनी डिग्री बहाल कराने का एक मौका दिया है। इसके तहत इन छात्रों को एक टेस्ट देना होगा, जो अब संभवत जून 2018 में होगा। फिलहाल एआइसीटीई ने ऐसे छात्रों से 15 जनवरी तक अपना पंजीकरण कराने को कहा है। जो छात्र डिग्री बहाल नहीं कराना चाहते, उनको फीस वापस मिलेगी। एआइसीटीई ने यह सहूलियत उन चार डीम्ड संस्थानों को दी है, जिनके दूरस्थ शिक्षा के तहत चलाए जा रहे इंजीनियरिंग कोर्स को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार देते हुए उनकी डिग्रियों को निलंबित कर दिया था। ये संस्थान इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, राजस्थान विद्यापीठ, आइएएसई राजस्थान और वीएमआरएफ तमिलनाडु हैं।

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