लखनऊ : सरकार का एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू करने का दावा अभी खोखला
है। स्कूल खुलने मात्र से शैक्षिक सत्र की शुरुआत का दावा किया जाना महज
एक मजाक कहा जा सकता है।
स्कूल में शिक्षक की बात की जाए तो वह अभी
मूल्यांकन में हैं। यदि बात नए पैटर्न को लागू करने की जाए तो एनसीईआरटी की
किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। फिलहाल अभी बच्चों को बिना शिक्षक व
किताब के ही स्कूल में समय गुजारना होगा।
विभाग भले ही सत्र की शुरुआत दो अप्रैल से करके अपनी पीठ थपथपा रहा हो, मगर
हकीकत यह है कि राजधानी के 40 प्रतिशत से अधिक शिक्षक मूल्यांकन में लगे
हैं। विभागीय जानकारों की माने तो करीब एक सप्ताह तक यह स्थिति बरकरार
रहेगी। ऐसे में स्कूल में पढ़ाई कैसे होगी।1दाखिला भी होगा, पढ़ाई भी होगी :
डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि दो अप्रैल से स्कूलों में
दाखिला भी होगा और पढ़ाई भी। उनका मानना है कि चीजें अपने आप सामान्य हो
जाएंगी, लेकिन वह यह नहीं बता सके कि बिना किताबों व शिक्षकों के पढ़ाई
कैसे होगी।’
बाजार में नहीं पहुंची नए पैटर्न की किताबें
मूल्यांकन में लगे शिक्षक नहीं पहुंच सकेंगे स्कूल
नहीं छपी कक्षा एक से आठ तक की किताबें
बेसिक शिक्षा विभाग कक्षा एक से आठ तक के छात्रों को दी जाने वाली
निश्शुल्क किताबों का टेंडर किए जाने की बात भले ही कह रहा हो, लेकिन
प्रकाशकों के अनुसार इन पुस्तकों की छपाई में कम से कम 90 दिन का वक्त
लगेगा। ऐसे में बच्चों को पुरानी किताबों से ही पढ़ना होगा।
बाजार में नहीं पहुंची नए पैटर्न की पुस्तकें1कक्षा नौ से 12 तक के बच्चों
को एनसीईआरटी की किताबें पढ़नी होगी, लेकिन यह किताबें अभी बाजार में
उपलब्ध नहीं है। इस दशा में बच्चे कौन सी किताबों के साथ स्कूल पहुंचेंगे
यह बताने वाला कोई नहीं।
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