इलाहाबाद : भर्तियों की जांच में उप्र लोकसेवा आयोग के अफसर, पीसीएस
परीक्षा में चयनित और इन दोनों के बीच सेतु का काम करने वाले बाहरी तत्व ही
नहीं, उन बोर्ड के सदस्यों पर भी सीबीआइ का शिकंजा कसने वाला है जिन्होंने
साक्षात्कार लेते समय नंबर दिए जाने की गोपनीयता भंग की।
सीबीआइ ने करीब दो
दर्जन बोर्ड सदस्यों पर संदेह जताते हुए उन्हें चिह्न्ति कर रखा है।
भर्तियों में भ्रष्टाचार की जद में आने वाले हर किसी के खिलाफ कार्रवाई तय
मानी जा रही है।1आयोग में पूर्व अध्यक्ष डा. अनिल यादव के कार्यकाल में
कर्मचारी से लेकर परीक्षक और साक्षात्कार लेने वाले बोर्ड तक उन्हीं के
इशारे पर काम करते थे। डा. अनिल यादव का प्रभाव कुछ ऐसा था कि उनके आदेश को
नकारने वाले को उसका खामियाजा भुगतना पड़ता था। इसके अलावा भर्तियों में
भ्रष्टाचार की लहर के साथ सभी बहने लगे थे। जिस पर प्रतियोगी छात्र संघर्ष
समिति ने आंदोलन के दरम्यान विरोध भी जताया था। साक्षात्कार लेने वाले
बोर्ड के गठन से लेकर उनकी ओर से अभ्यर्थी को अंक दिए जाने तक की प्रक्रिया
पूरी तरह गोपनीय रहती है लेकिन, पूर्व अध्यक्ष डा. अनिल यादव के कार्यकाल
में सभी गोपनीयता उन्हीं के चेंबर में भंग हो जाती थी।1अब तक की जांच
पड़ताल में सीबीआइ को भी इसके प्रमाण मिले हैं कि बोर्ड सदस्यों का भी
अभ्यर्थियों के अवैध चयन में कहीं न कहीं हाथ था। इसी कारण सीबीआइ अफसरों
ने आयोग में कई स्तर पर पूछताछ करके बोर्ड सदस्यों के बारे में जानकारी
एकत्र की और उन पर भी शिकंजा कसने की रणनीति तैयार कर ली है। सीबीआइ के
सूत्र बताते हैं कि करीब दो दर्जन लोगों पर संदेह जताया गया है जिनसे जल्दी
ही पूछताछ हो सकती है। प्रमाण पुख्ता हो जाने पर गिरफ्तारी भी हो सकती है।
सीबीआइ अफसरों का कहना है कि आयोग में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार का पता
चला है।
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