बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान पर हुआ जोरदार हंगामा
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को उस समय माहौल गर्म हो गया, जब समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने सरकार की शिक्षक भर्ती और तबादला व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल खड़े कर दिए। भरे सदन में पूछे गए सवालों ने सरकार के दावों की पोल खोलने का काम किया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
📌 शिक्षक भर्ती और तबादलों पर सवाल
डॉ. रागिनी सोनकर ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि—
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प्रदेश के कई विद्यालयों में छात्र संख्या कागजों में बढ़ाई जा रही है
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छात्र संख्या बढ़ाकर अनावश्यक पद सृजन और समायोजन किया जा रहा है
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वास्तविक स्थिति और सरकारी आंकड़ों में भारी अंतर है
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक भर्ती और तैनाती में पारदर्शिता का दावा केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
🗣️ मंत्री के बयान पर भड़का विपक्ष
डॉ. रागिनी सोनकर के सवालों का जवाब देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं और दावा किया कि—
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अब शिक्षकों के तबादले पूरी तरह पारदर्शी हैं
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वर्ष 2017 से पहले के दौर में तबादलों में भ्रष्टाचार होता था
मंत्री के इस बयान पर विपक्ष भड़क उठा।
⚠️ नेता प्रतिपक्ष का कड़ा विरोध
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा—
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बिना पुख्ता सबूत के ऐसे आरोप लगाना असंसदीय है
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अगर भ्रष्टाचार का आरोप है तो सरकार को ठोस प्रमाण पेश करने चाहिए
इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
🏛️ विधानसभा अध्यक्ष की सख्त टिप्पणी
विवाद बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा—
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भविष्य में सदन में आरोप लगाने से पहले
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शपथ पत्र (Affidavit) देना अनिवार्य किया जाएगा
इस टिप्पणी के बाद सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया।
🏫 स्कूल मर्जर पर भी सफाई
इसी दौरान मंत्री संदीप सिंह ने विद्यालयों के मर्जर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि—
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स्कूल बंद नहीं किए जा रहे
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बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है
📝 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश विधानसभा में उठा यह मुद्दा साफ तौर पर दर्शाता है कि—
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शिक्षक भर्ती
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तबादला नीति
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छात्र संख्या और स्कूल मर्जर
जैसे विषय आने वाले समय में राजनीतिक और शैक्षिक बहस के केंद्र में रहेंगे। डॉ. रागिनी सोनकर के सवालों ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं सरकार ने अपनी नीतियों को सही ठहराने की कोशिश की है।