उत्तर प्रदेश में परिषदीय शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। बांदा जिले के बबेरु विधानसभा क्षेत्र में शिक्षकों ने तबादला प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां जताते हुए स्थानीय विधायक को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में लागू की जा रही शिक्षक ट्रांसफर नीति न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
🧑🏫 शिक्षकों का आरोप: नियमों को दरकिनार कर किए जा रहे तबादले
शिक्षकों ने बताया कि बिना अतिरिक्त शिक्षक समायोजन (Teacher Adjustment Rules UP) किए ही जबरन तबादले किए जा रहे हैं। कई विद्यालय पहले से ही एकल शिक्षक विद्यालय की श्रेणी में हैं, ऐसे में वहां से शिक्षकों का स्थानांतरण बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डालेगा।
📌 प्रमुख मांगें क्या हैं?
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अवैध शिक्षक स्थानांतरण तत्काल रोका जाए
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पहले सरप्लस शिक्षक समायोजन पूरा किया जाए
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बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन हो
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शिक्षकों को चुनाव, BLO, SIR जैसे कार्यों से मुक्त किए बिना ट्रांसफर न किया जाए
⚠️ शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है असर
शिक्षकों का कहना है कि लगातार हो रहे तबादलों से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, छात्र उपस्थिति, और प्राथमिक शिक्षा सुधार योजना प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है और ऐसे में स्थानांतरण स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
🏛️ विधायक ने दिया आश्वासन
ज्ञापन सौंपने के दौरान विधायक ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को राज्य सरकार, शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश, और बेसिक शिक्षा सचिव तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
🔍 क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
यह मामला केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में UP Teacher Transfer News, Primary Teacher Protest, और Shikshak Sangh Andolan जैसे विषय लगातार चर्चा में हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी नौकरी, शिक्षा नीति, और शिक्षक अधिकार से जुड़ा विषय है।