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शिक्षामित्रों की जीत का मार्ग प्रशस्त कैसे हो?

सोशल मीडिया से लेकर हर जगह आम चर्चा का का विषय है कि जब शिक्षामित्रों के वकीलो की बातों पर कोर्ट कान नहीं धर रहा है और सरकारी वकील मात्र शो पीस हो के रह गया है ऐसे में क्या कोई रास्ता है कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखने का?
*मिशन सुप्रीम कोर्ट ग्रुप के विधिक जानकार इस मसले पर पिछले काफी समय से चिंतन मनन करते आ रहे हैं। सरकारी वकील के साथ समन्वय का बिंदु इसलिए भी कारगर नहीं है क्योंकि सरकारी वकील सरकार के पक्ष को ही रखेगा। जबकि कई ऐसे बिंदु है जिन पर सरकार कमज़ोर है और शिक्षामित्रों के वकील उसे मज़बूती दे सकते हैं। लेकिन उन्हें सुनने की स्थिति बनने से पहले कोर्ट मछली बाजार बन जाता है।
*तो फिर इसके अलावा शिक्षामित्रों के पास क्या रास्ता है अपनी बात कोर्ट को समझाने का?*
मिशन सुप्रीम कोर्ट ने अपनी दिन रात की मेहनत और शोध व अध्ययन से एक रास्ता खोजा है। *ये रास्ता है खुद याची बनकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत होने का।*
और मिशन अपने मक़सद में कामयाब होने के लिए क़दम बढा चूका है। जो लोग हमारी कामयाबी में सहयोगी बनना चाहें वे हमें आर्थिक सहयोग देने के लिए आगे आएं।
*मिशन सुप्रीम कोर्ट ग्रुप जागरूक और विधिक जानकार शिक्षामित्रों का समूह है। आम शिक्षामित्र अपने अधिकार के लिए अपने "मिशन सुप्रीम कोर्ट ग्रुप" के साथ लड़ रहा है, और ​अपनी आजीविका और मान सम्मान की रक्षा के लिए वचनबद्ध है*
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