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मेधावियों के अंक छिपा रहा बोर्ड, 10 दिन बाद भी उत्तर पुस्तिकाएं वेबसाइट पर अपलोड नहीं जल्द पूरी होगी प्रक्रिया

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : यूपी बोर्ड ने परीक्षा में सख्ती और रिजल्ट प्रतिशत में जिस तरह की दरियादिली दिखाई है। वैसी हिम्मत अब मेधावियों की उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड करने में नहीं दिखा पा रहा है।
यही वजह है कि परिणाम आने के दस दिन बाद भी वेबसाइट पर उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड नहीं हो सकी हैं, कहा जा रहा है कि अभी उम्दा कॉपियों का चयन चल रहा है। यह भी संकेत है कि बोर्ड प्रशासन मेधावियों की कॉपियां सार्वजनिक करेगा लेकिन, उनके अंक उजागर नहीं करेगा।
प्रदेश सरकार ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2018 के टॉपरों की कॉपियों को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने दावा किया था कि रिजल्ट आने के एक सप्ताह में कॉपियां वेबसाइट पर होंगी। यह कदम उठाने के पक्ष में कहा गया था कि इससे अन्य परीक्षार्थियों को प्रश्नों का सही से जवाब लिखने की प्रेरणा मिलेगी, वहीं टॉपरों की ख्याति बढ़ेगी। बीते 29 अप्रैल को आए बोर्ड के रिजल्ट प्रतिशत और फिर मॉडरेशन के नाम पर अंक बांटने के मामले उजागर होने से सरकार व बोर्ड प्रशासन इन दिनों बैकफुट पर है। शायद इसीलिए बोर्ड प्रशासन ने कॉपियां सार्वजनिक करने के पहले ही दो बदलाव किए हैं। पहला, वह टॉपरों की जगह मेधावियों की कॉपी वेबसाइट पर डालेगा। कहा गया कि इसमें प्रमुख विषयों के मेधावियों का चयन किया जा रहा है, ताकि सही मायने में छात्र-छात्रओं को लाभ मिल सके। दूसरा, मेधावियों की कॉपियों पर मिले अंक उजागर नहीं होंगे। इसकी वजह यह है कि प्रश्नों के जवाब में मिले अंक सार्वजनिक होने से विवाद बढ़ने की आशंका है, वहीं मूल्यांकन प्रणाली और मॉडरेशन के नाम पर दिए गए अंक भी जगजाहिर हो जाएंगे। यह अंक छिपाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। परीक्षार्थी कहते हैं कि अंक न दिखाने से कॉपियां सार्वजनिक करने से क्या लाभ होगा। बोर्ड जिस तरह से मॉडल प्रश्नपत्र जारी करता है, उसी तरह से शिक्षकों से प्रश्नों के बेहतर जवाब लिखवाकर उसे भी अपलोड दे कि यही सबसे सही जवाब है। मेधावियों की कॉपियां व अंक दोनों दिखने पर ही यह कदम सही कहा जाएगा।

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