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राजफाश - 50 करोड़ में बीएड की ‘बैड डील’ : 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती Latest News

जागरण संवाददाता, आगरा : अंबेडकर विवि के बीएड फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलती जा रही है। जागरण के खुलासे के बाद फर्जी छात्रों को परीक्षा में शामिल कराने के लिए 50 करोड़ की ‘बैड डील’ का मामला सामने आया है। विवि के अधिकारी, कॉलेज संचालक और एजेंसी के अधिकारियों ने मिलकर पूरा फर्जीवाड़ा किया।

जागरण ने आठ और 12 दिसंबर के अंक में बीएड सत्र 2013-14 में फर्जी छात्र बिठाए जाने का खुलासा किया था। इसके बाद परीक्षाफल रोक दिया गया है। फर्जीवाड़ा एक साल से चल रहा था, इसके लिए तीन बार परीक्षाएं टाली गईं। पिछले साल नवंबर में परीक्षा फॉर्म भरे गए, इसमें कॉलेज संचालकों ने काउंसिलिंग के बिना प्रवेश लेने वाले 2275 छात्रों के फॉर्म भर दिए। इसके लिए कॉलेज संचालक सीधे प्रवेश लिए गए छात्रों को परीक्षा दिलाने के लिए कोर्ट का आदेश भी ले आए, इसी बीच शिक्षा माफिया सक्रिय हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, एक से सवा लाख में प्रथम श्रेणी की बीएड मार्कशीट के लिए बुकिंग की गई। इस तरह करीब पांच हजार छात्रों से 50 करोड़ रुपये लिए गए। परीक्षा से दो दिन पहले विवि के अधिकारी और एजेंसी संचालक से साठगांठ कर परीक्षा फॉर्म भरवा दिए। विवि के अधिकारियों ने अपनी मेल आइडी पर प्रवेश पत्र मंगवाए और कॉलेज में भेज दिए। यही नहीं, कॉलेजों को सेल्फ सेंटर भी बना दिया, जिससे फर्जीवाड़ा न पकड़ा जा सके और नकल कराकर फर्जी छात्र प्रथम श्रेणी में पास करा दिए जाएं।

तीन महीने में नहीं की जांच, कॉलेजों पर गिरेगी गाज : विवि प्रशासन तर्क दे रहा है कि कोर्ट के आदेश पर फॉर्म भरवा लिए। परीक्षाएं अगस्त में हो गईं, इसके बाद परीक्षा फॉर्म की जांच क्यों नहीं की गई? कॉलेज संचालकों से सीधे प्रवेश लेने वाले छात्रों की बीएड परीक्षा का रिकॉर्ड क्यों नहीं मांगा गया।

ऐसे हुआ खेल : बीएड काउंसिलिंग से प्रवेश लेने वाले छात्र -12822

परीक्षा में शामिल हुए छात्र - 20097

सीधे प्रवेश लेने वाले छात्र - 2275 (अनुमानित)

बिना पढ़े परीक्षा में शामिल छात्र - 5000बीएड में फर्जी छात्र शामिल होने की जांच कराई जा रही है, दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

-प्रोफेसर मोहम्मद मुजम्मिल, कुलपति 11बीएड के फॉर्म पूर्व कुलसचिव बीके पांडे और प्रभात रंजन के समय भरे गए थे। फर्जीवाड़ा न हो सके, इसके लिए इस बार काउंसिलिंग से प्रवेश लेने वाले छात्रों के ही फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।

-केएन सिंह, तत्कालीन कुलसचिव
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