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साढे तीन लाख टेट सीटेट के साथ सौतेला व्यवहार अखिलेश को ले डूबा , नोकरी मिली भी तो हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से

साढे तीन लाख टेट सीटेट के साथ सौतेला व्यवहार अखिलेश को ले डूबा- 5 साल से नोकरी के लिए टेट अभ्यर्थियों ने एड़ी चोटी जोर लगा रखा था, नोकरी मिली भी तो हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से, जबकि नोकरी सरकार के माध्यम से आसानी से मिल सकती थी।
72825 शिक्षक भर्ती सुप्रीम कोर्ट से हो पाई थी, जिसे सपा सरकार ने हर संभव रोकने की कोशिश की,
यही नहीं लाखो अन्य टेट अभ्यर्थियों को दर किनार कर शिक्षा मित्रों का सीधे समायोजन कर दिया, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था।

शिक्षा की गुणवत्ता से कतई खिलवाड़ नहीं की जानी चाहिए,
अगर शिक्षा मित्र उचित योग्यता नहीं रखते तो सरकार के अन्य विभागों, मिड डे मील इत्यादि में लगा कर उनको बेरोजगार न करते हुए भी न्यायिक रास्ता था, लेकिन जो शिक्षक जब खुद योग्य नहीं होंगे तो वो वो बच्चों को कैसे योग्य बनाएंगे, क्या इस प्रकार RTE RIGHT TO EDUCATION का पालन होगा।
देश के करोड़ों अरबों टेक्स पेयर सेल टेक्स, इनकम टैक्स, सर्विस टैक्स से सरकार धन वसूलती है, तो सरकार की पूरी जवाब देही है कि एक एक पाई उचित रूप से खर्च की जाए।
जब तक शिक्षक बनने की योग्यता न हो तब तक अन्य क्षेत्रों में कार्य दे कर नोकरी दी जा सकती है, लेकिन देश के भावी भविष्य (बच्चों को शिक्षा) से खिलवाड़ देश की रीढ़ की हड्डी तोड़ने के बराबर है।

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