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90 दिन में समस्त खाली पदों पर भर्ती शुरू करने के चुनावी वादा पूरा करे योगी सरकार

भाजपा के घोषणा पत्र जिसे लोक कल्याण संकल्प पत्र का नाम दिया गया है में वादा किया गया है कि सरकार गठन के 90 दिन के भीतर प्रदेश में खाली समस्त पदों पर (लगभग 10 लाख पद खाली हैं) चयन प्रक्रिया शुरू
कर दी जायेगी।
परन्तु योगी सरकार की पहली कैबिनेट में इस संबंध में कोई कदम उठाने के बजाय नई भर्तियों व चालू चयन प्रक्रिया पर अनिश्चितकाल तक रोक का आदेश जरूर दे दिया गया। योगी सरकार की इस कार्रवाई से न सिर्फ युवाओं में निराशा पैदा हुई है बल्कि वे आंदोलित भी हैं। सरकार का यह तर्क किसी के गले नहीं उतर रहा है कि अखिलेश सरकार के कार्यकाल में हुई समस्त भर्तियों की जांच कराने के बाद ही आयोगों व चयन बोर्ड में कामकाज शुरू किया जायेगा। क्या सरकार यह मानती है कि सत्ता के संरक्षण के बिना भर्तियों में बड़े पैमाने पर धाॅधली संभव है, यदि ऐसा नहीं है तो जांच कराने के नाम पर क्यों चयन प्रक्रिया का कामकाज ठप कर दिया गया और नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई। सरकार समस्त भर्तियों की जांच कराने की बड़ी-2 बात जरूर कर रही है लेकिन जिन भर्तियों में भारी अनियमितता व धाॅधली के आरोप हैं वहां भी जांच का आदेश नहीं दिया गया। तब सरकार की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी तरह मोदी जी ने भी लोक सभा चुनाव के वक्त हर साल 2 करोड़ रोजगार सृजित करने का वादा किया था। लेकिन आज यूपीए सरकार के दौर से भी ज्यादा बेरोजगारी में ईजाफा हुआ है। यह अलग बात है कि मीडिया में यह दिखाया जाता है कि मोदी जी युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। दरअसल मनमोहन की सरकार रही हो या फिर मोदी जी की सभी में जाॅबलेस ग्रोथ अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषता है और जब तक कारपोरेट को भारी मुनाफा पहुॅचाने वाली नीतियों को बदला नहीं जायेगा तब तक युवाओं को रोजगार संभव नहीं है, भले ही मोदी जी और योगी जी चाहें जितनी युवा हित की बात कर ले। इसलिए आज वक्त की जरूरत है कि युवा नीति बनायी जाये और रोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाये।

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