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केंद्र और राज्य स्तर पर भरे जाएंगे 20 लाख खाली पद: श्रम मंत्रालय की पहल, केंद्र में ही 6 लाख पद खाली

मोदी सरकार बेरोजगारी की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर 20 लाख खाली पदों को भरने की योजना बना रही है। इनमें सरकारी कंपनियों में खाली पद भी शामिल हैं।
इसकी शुरुआत केंद्रीय मंत्रालयों और पब्लिक सेक्टर की 244 कंपनियों से हो सकती है। सिर्फ रेलवे में सेफ्टी संबंधी मामलों के लिए दो लाख से अधिक लोगों को हायर किया जाना है।

यह पहल श्रम मंत्रालय की तरफ से हुई है। मोदी सरकार इस तरह से जॉबलेस ग्रोथ को लेकर हो रही आलोचना का जवाब देने जा रही है। श्रम मंत्रालय केंद्र सरकार के विभागों और संस्थानों में वैकंसी का पता लगा रहा है और इसके बाद वह एक प्लान पेश करेगा। इसमें डेली, वीकली और मंथली बेसिस पर इन पदों को भरने की योजना होगी। यह जानकारी एक बड़े सरकारी अधिकारी ने दी है।

प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए एक के बाद एक सरकारों ने भर्तियों पर रोक लगा दी थी। आने वाले कुछ महीनों में सरकार इन खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिससे यह सिलसिला टूटेगा। हालांकि, केंद्र ऐसे समय में इन पदों को भरने जा रहा है, जब फिस्कल डेफिसिट टारगेट को हासिल करने का उस पर दबाव बढ़ रहा है।

अनुमान के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रालयों के स्तर पर 6 लाख से अधिक पद खाली हैं। केंद्रीय स्तर पर भर्ती अभियान सफल रहने के बाद राज्य स्तर पर यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी, जिससे 20 लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है। अधिकारी ने बताया, ‘श्रम मंत्रालय जल्द ही सभी मंत्रालयों और सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज को लेटर लिखकर उन्हें खाली पदों की जानकारी देगा। उसके बाद इन पदों को भरने के लिए वह रोजाना का लक्ष्य तय करेगा। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को नौकरी मिलने की उम्मीद है।’ इस पहल से केंद्र सरकार को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वह खुद डेली और मंथली बेसिस पर कितने लोगों को रोजगार दे सकती है।

सरकार पर रोजगार के मौके बढ़ाने का काफी दबाव है क्योंकि हर महीने 10 लाख लोग वर्कफोर्स में जुड़ रहे हैं। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2012 से 2016 के बीच देश में हर साल 36.5 लाख नए रोजगार के मौके बने थे। वित्त वर्ष 2012 में देश में कुल वर्कफोर्स 47.36 करोड़ था, जिनमें से 23 करोड़ एग्रीकल्चर और 24 करोड़ इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर से जुड़े थे।

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