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BTC बैच वरीयता की माँग करने के मुख्य बिंदु निम्न

बैच वरीयता की माँग करने के मुख्य बिंदु निम्न है।
1- मूल नियमावली 1981मे बैच वरीयता देने का नियम 14-में प्राविधान है।

2-बेसिक एक्ट 1972 की धारा 19- के तहत मूल नियमावली 1981 की पूर्व   की शक्ति को प्रभाव डाले बिना ही कोई संशोधन किया जा सकता है।अतःबैच वरीयता नही समाप्त की जा सकती है।
3-सभी बोर्ड की मूल्यांकन  का नियम एक समान नही है।अतःसीनियर बैच के साथ जूनियर बैच मिलाकर प्रतिस्पर्धा नही कराई जा सकती।
4-समता का अधिकार आर्टिकल 14 और 16 का उल्लंघन होगा।                      
 5-एन सी टी ई के नियमानुसार टेट केवल पात्रता परीक्षा है।जिससे नियुनतम शैक्षिक योग्यता का निर्धारण किया जाता है।न कि चयन का।उत्तर प्रदेश में चयन बेसिक सेवा नियमावली 1981के तहत किया जाता है।
6-जिला वरीयता के साथ में बैच वरीयता दी जाती रही है।बैच वरीयता न देने से अधिक गुणांक वाले लोगों का अपने जिले में चयन नही होता जबकि कम गुणांक वाले का अपने जिला में चयन हो जाता है।
7- बीटीसी 12 बैच तक ग्रह जनपद से ही प्रशिक्षण देने का नियम रहा है।इसलिए सत्र वरीयता दिए बिना जिला वरीयता नही दी जा सकती।
8- बीटीसी को सरकार रोजगार नही देगी तो जीवन भर बेरोजगार ही रहना पड़ेगा।क्योंकि प्राइवेट सेक्टर में बीटीसी के लिए कोई रोजगार नही है।
9-बीटीसी प्रशिक्षण का चयन 12 बैच तक जनपद स्तरीय चयन समिति द्वारा आरक्षण नियमो का पालन करते हुए किया गया है।अतःआरक्षण का लाभ एक बिंदु पर दो बार नही दिया जा सकता है सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार।अतः सभी बीटीसी टेट पास को बैच वाइड या सभी को समायोजित किया जाए।
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