एटा। वित्तविहीन शिक्षक-शिक्षिकाएं बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी करने से हाथ
खड़े कर रहे हैं। मनमानी का आलम यह है कि ढाई सौ से अधिक विद्यालयों ने अभी
तक सेवारत शिक्षकों की सूची ही नहीं दी है। ऐसे में डीआईओएस ने कार्रवाई
की चेतावनी दी है।
पूर्ण शिक्षक बनने की मांग करने वाले जिले के
वित्तविहीन शिक्षक शिक्षकों के काम करने से कतरा रहे हैं। नकल विहीन
परीक्षाओं के संचालन में वित्तविहीन शिक्षक सहयोग नहीं कर रहे हैं। डीआईओएस
की चेतावनी के बाद भी जिले के ढाई सौ से अधिक वित्तविहीन विद्यालयों ने
अभी तक सेवारत शिक्षकों की सूची नहीं भेजी है।
वहीं डेढ़ सौ से
अधिक संस्थाएं ऐसी हैं, बीते वर्षों में सरकार से मानदेय भी ले चुकी हैं।
जिले के सवा दो सौ विद्यालयों के दो हजार से अधिक शिक्षक शिक्षिकाओं को
मानदेय दिया गया था। बता दें कि बोर्ड परीक्षाओं में डेढ़ हजार परिषदीय
शिक्षक शिक्षिकाओं की ड्यूटी लगाई गई है।
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निर्देशों के
बाद भी सेवारत शिक्षकों की सूची न देने वालों में सौ से अधिक मानदेय लेने
वाली संस्थाएं शामिल हैं। इनकी सूची न आने पर संस्था शिक्षकों को दिए गए
मानदेय की रिकवरी प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक से की जाएगी।
-श्याम प्रकाश यादव, डीआईओएस
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