जागरण संवाददाता, मैनपुरी: परिषदीय स्कूलों के स्वेटर वितरण में
कमीशनखोरी का ऐसा खेल खेला गया कि खंड शिक्षाधिकारियों ने अभी तक अपनी जांच
रिपोर्ट तक नहीं दी। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर जांच रिपोर्ट दबाए बैठे
हैं। स्वेटर वितरण का उपभोग प्रमाण पत्र देने में भी अधिकारी आनाकानी कर
रहे हैं।
परिषदीय स्कूलों के करीब सवा लाख बच्चों को ठंड से बचने के लिए स्वेटर
बांटे जाने थे। इसके लिए शासन ने करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि
जारी कर दी। 200 रुपये के स्वेटर की एक किस्त के रूप में सौ रुपये स्कूलों
को जारी कर दिए गए थे। दूसरी किस्त के रूप में बाकी सौ रुपये उपभोग प्रमाण
पत्र मिलने पर जारी होने थे, लेकिन कमीशनखोरी के खेल में बच्चों के साथ भी
छल किया गया। कई स्कूलों में घटिया क्वालिटी के स्वेटर कुछ ठेकेदारों से
साठगांठ कर बांट दिए गए। इन स्वेटरों की कीमत सरकार से तय कीमत की आधी भी
नहीं है। दैनिक जागरण ने पिछले दिनों इस घपलेबाजी को उजागर किया, तो बेसिक
शिक्षा विभाग में खलबली मच गई। आनन-फानन में बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों
से जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। 27 फरवरी को बीएसए विजय प्रताप
¨सह ने आदेश जारी कर तीन दिन में जांच रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन
शिक्षाधिकारियों ने अब तक जांच रिपोर्ट ही नहीं दी। सूत्रों का कहना है कि
इस दौरान स्कूलों में स्वेटर वितरण की गड़बड़ी दूर करने की कवायद की जा रही
है।
सूत्रों का यह भी का कहना है कि कई स्कूलों में अभी तक स्वेटर ही नहीं
बांटे गए। ऐसे में खंड शिक्षाधिकारियों ने उपभोग प्रमाण पत्र भी नहीं दिया
है। अब तक सिर्फ कुरावली, घिरोर और करहल के ही उपभोग प्रमाण पत्र मिले हैं।
बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक गड़बड़ी की बात सामने नहीं आई
है। जांच रिपोर्ट के लिए अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा गया है।
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