इलाहाबाद : उप्र लोक सेवा आयोग से सीधी भर्ती के तहत जो विज्ञापन
प्रकाशित कराए गए, उनमें भी ‘खेल’ होने का संदेह है। कई भर्तियों के
विज्ञापन बार-बार बदले गए। इनमें अनारक्षित वर्ग के अलावा आरक्षित वर्ग के
अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाने की संख्या में फेरबदल किया गया।
प्रतियोगियों की इस शिकायत पर सीबीआइ ने आयोग में इस बिंदु पर भी गहनता से
पूछताछ शुरू कर दी है। परीक्षा विभाग के कार्यरत अधिकारियों से मंगलवार और
बुधवार को सवाल हुए।1आयोग ने पांच साल में प्रतियोगी परीक्षाएं तो गिनी
चुनी कराईं लेकिन, सीधी भर्ती पर ज्यादा जोर रहा। केवल साक्षात्कार के आधार
पर जीआइसी व डायट में प्रवक्ता सहित अन्य विभागों में हजारों कर्मचारियों
की भर्ती की गई। सीधी भर्ती में आवेदनों के आधार पर पदों की तुलना में कई
गुना अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाने की व्यवस्था रही है। इसके
लिए विज्ञापन प्रकाशित कराए जाने का नियम था। आयोग ने सभी भर्तियों के
विज्ञापन प्रकाशित कराए भी लेकिन, कई बार विज्ञापनों में संशोधन हुआ। इसमें
श्रेणी वार जितने अभ्यर्थी पहले बुलाए गए थे संशोधित विज्ञापन में उस
संख्या में फेरबदल हुआ। प्रतियोगियों के अनुसार आयोग ने इसी संशोधन में
तिकड़म लगाते हुए अपने चहेतों को चयनित किया, जबकि योग्य अभ्यर्थी चयन से
बाहर हो गए। इलाहाबाद स्थित कैंप कार्यालय पर आइ ऐसी शिकायतों को भी सीबीआइ
ने संज्ञान लिया। जिसके आधार पर पिछले दिनों से आयोग में सीधी भर्ती से
परिणाम के सभी रिकार्ड मांग लिए गए। इनके अलावा दो दिनों से सीबीआइ ने सीधी
भर्ती के विज्ञापन में बार-बार बदलाव होने के संबंध में जानकारी जुटाई।
विज्ञापन क्यों बदले गए, किसके आदेश पर, विज्ञापन कहां-कहां प्रकाशित कराए
गए। कई विज्ञापन तो रोजगार की जानकारी देने वाले एक समाचार पत्र में
प्रकाशित ही नहीं कराए गए। सीबीआइ ने यह भी जानकारी मांगी कि विज्ञापन के
प्रकाशन में नियमों का उल्लंघन क्यों किया गया।
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