एनबीटी, लखनऊ संस्कृत
शिक्षक कम वेतन में भी कठिन परिश्रम के साथ काम कर रहे हैं। संस्कृत परिषद
के विद्यालयों के शिक्षकों की वेतन से जुड़ी दिक्कतों को दूर किया जाएगा।
ये बातें प्रदेश के डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा ने शुक्रवार को कहीं।
वह
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में आयोजित
पंद्रह दिवसीय संस्कृत शिविर के समापन पर बतौर विशिष्ट अतिथि बोल रहे थे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक, विशिष्ट अतिथि
कैबिनेट मंत्री अनुपमा जायसवाल और महेंद्र सिंह रहे। इस मौके पर प्रमुख
सचिव भाषा जितेंद्र कुमार, संस्थान के अध्यक्ष डॉ वाचस्पति मिश्र, संस्कृत
शिक्षक डॉ संजीव कुमार और डॉ जगदानंद झा समेत कई शिक्षक और संस्थान के
कर्मचारी मौजूद रहे।
डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि शिविर में
प्रदेश के छह सौ शिक्षकों को संस्कृत की ट्रेनिंग दी गई है। अब यह शिक्षक
प्रदेश के विद्यालयों में ट्रेनिंग देंगे। उन्होंने कहा कि संस्कृत इंसान
को सुसंस्कृत करने की भाषा है। समारोह की शुरुआत राज्यपाल सभागार में मौजूद
लोगों ने वंदेमातरम गाकर की। इसके बाद रामनाईक ने मौजूद अतिथियों को अपनी
किताब 'चरैवेति-चरैवेति' भेंट की। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत पुरातन भाषा
है, जानते कितने लोग हैं और क्या होगा इस भाषा का, यह जानना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने संसद में लिखीं संस्कृत सूक्तियों के बारे में जिक्र करते हुए
उनका महत्व बताया। मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि बेसिक शिक्षकों को
संस्कृत प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह छात्रों को संस्कृत सिखा सकें।
उन्होंने कहा कि संस्कृत प्रमाणिक, रमणीक और मनोहरी भाषा है, जिसके उच्चारण
से हम ज्ञान के साथ ही निरोग भी रहते हैं।
मंत्री महेंद्र सिंह ने
दिनचर्या में इस्तेमाल होने वाले संस्कृत के श्लोकों और महत्व के बारे में
बताया। प्रमुख सचिव भाषा जितेंद्र कुमार ने प्रशिक्षित युवाओं से मास्टर
ट्रेनर के रूप में जाकर लोगों को संस्कृत सिखाने की बात कही। कार्यक्रम में
योजना संयोजक संजीव कुमार ने चित्रकथा के जरिए सरल संस्कृत वाचन के उदाहरण
पेश किए और संस्कृत भाषा के व्यंजनों के शारीरिक लाभ बताए।
75 जिलों में दीपालय
संस्थान
के अध्यक्ष वाचस्पति मिश्र ने संस्थान की ओर से प्रदेश के हर जिले में
संस्कृत दीपालय खोलने की बात कही। उन्होंने कहा कि संस्थान की ओर से 75
जिलों में संस्कृत दीपालय खोले जाएंगे। इसमें संस्थान के अध्यापक बेसिक और
प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को संस्कृत प्रशिक्षण देंगे ताकि वह
बच्चों को संस्कृत पढ़ा सकें।
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