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दुनिया के मुकाबले भारत में सबसे तेज वेतन वृद्धि की उम्मीद

 एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, 2023 में लगातार दूसरे वर्ष बढ़ती मुद्रास्फीति वेतन वृद्धि का आकर्षण घटाने के लिए तैयार है। इसमें वैश्विक स्तर पर केवल 37 फीसदी देशों में वास्तविक वेतन वृद्धि होने की उम्मीद है।



वर्कफोर्स कंसल्टेंसी ईसीए इंटरनेशनल के अनुसार महंगाई के असर को घटाकर वास्तविक वेतनवृद्धि के मामले में भारत सबसे आगे हो सकता है जहां इस साल 4.6 फीसदी वेतन बढ़ने का अनुमान है। रिपोर्ट की मानें तो इस मोर्चे पर सबसे बड़ा झटका यूरोप को लगने की संभावना है, जहां वेतन नकारात्मक 1.5 फीसदी रह सकता है।

अमेरिका का हाल भी बेहतर नहीं दिख रहा

वेतनवृद्धि के मामले में अमेरिका में भी स्थिति अच्छी नहीं दिख रही है। अमेरिका में अगले साल 4.5 फीसदी वेतनवृद्धि होने का अनुमान है लेकिन 3.5 फीसदी औसत महंगाई को घटाकर देखें तो वास्तविक वेतनवृद्धि एक फीसदी रह सकती है। वहां महंगाई चार दशक के चरम पर है।


ब्रिटेन को तगड़ा झटका
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2000 में सर्वेक्षण शुरू होने के बाद से ब्रिटेन के कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के मामले में इस साल सबसे बड़ा झटका लगने वाला है। वहां 3.5 फीसदी औसत नाममात्र वेतन वृद्धि के बावजूद, 9.1 फीसदी औसत मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक रूप से वेतनवृद्धि -5.6 रह सकती है। साथ ही अगले साल भी चार फीसदी गिरावट की आशंका है।

श्रमिकों के लिए कठिन वर्ष होने की आशंका
एशिया के लिए ईसीए इंटरनेशनल के क्षेत्रीय निदेशक, ली क्वान ने कहा, हमारा सर्वेक्षण 2023 में वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के लिए एक और कठिन वर्ष का संकेत देता है। सर्वेक्षण किए गए देशों में से केवल एक तिहाई में वास्तविक वेतन वृद्धि देखने का अनुमान है, हालांकि यह 2022 से बेहतर है जो इस वर्ष से कहीं ज्यादा है। ईसीए के अनुसार, 2022 में औसत वेतन 3.8 गिर गया। ईसीए का वेतन रुझान सर्वेक्षण 68 देशों और शहरों में 360 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों से एकत्रित जानकारी पर आधारित है।

वेतनवृद्धि के मामले में चीन से आगे वियतनाम
एशिया के शीर्ष 10 देशों में से आठ में वास्तविक वेतन वृद्धि दिखने का अनुमान है। भारत वास्तविक वेतनवद्धि 4.6 रह सकती है जो एशिया के साथ दुनिया में भी सबसे अधिक हो सकती है। वियतनाम में यह चार फीसदी और चीन में 3.8 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।

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