लेखपाल भर्ती विज्ञापन में बदलाव से बढ़ा विवाद
उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती के संशोधित विज्ञापन को लेकर प्रतियोगी छात्रों के एक वर्ग ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। छात्रों का आरोप है कि आरक्षण श्रेणियों में बदलाव कर अनारक्षित वर्ग के पदों में भारी कटौती की गई, जो मेधावी छात्रों के साथ अन्याय है।
यह मामला 16 दिसंबर को जारी मूल विज्ञापन और बाद में जारी संशोधित विज्ञापन के बीच पदों के वितरण में बदलाव से जुड़ा है।
मूल विज्ञापन (16 दिसंबर) में पदों का विवरण
कुल पद: 7994
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🔹 अनारक्षित (UR): 4165
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🔹 अनुसूचित जाति (SC): 1446
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🔹 अनुसूचित जनजाति (ST): 150
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🔹 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 1441
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🔹 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 792
संशोधित विज्ञापन में बदला गया आरक्षण विवरण
कुल पद: 7994
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🔻 अनारक्षित (UR): 3205
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🔺 अनुसूचित जाति (SC): 1697
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🔺 अनुसूचित जनजाति (ST): 160
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🔺 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 2158
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🔹 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 792
छात्रों का कहना है कि अनारक्षित वर्ग के 960 पद कम कर दिए गए, जबकि अन्य वर्गों में पदों की संख्या बढ़ाई गई।
मुख्यमंत्री को पत्र, श्वेतपत्र जारी करने की मांग
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी एवं छात्र आंदोलन समन्वय समिति के संयोजक प्रशांत पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकार से श्वेतपत्र (White Paper) जारी करने की मांग की है।
पत्र में निम्न सवाल उठाए गए हैं:
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❓ पहले जारी विज्ञापन कैसे गलत था?
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❓ यदि गलत था तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
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❓ संशोधित विज्ञापन में अनारक्षित पदों को किस आधार पर घटाया गया?
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❓ क्या यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया?
छात्रों का आरोप: मेधावी छात्रों के साथ अन्याय
छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार राजनीतिक दबाव में आकर अनारक्षित वर्ग के योग्य और मेहनती छात्रों के अधिकारों का हनन कर रही है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूर्व में जारी विज्ञापन के अनुसार नहीं की गई, तो:
⚠️ छात्र न्यायालय की शरण लेंगे
⚠️ प्रदेश-व्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा
क्यों अहम है यह मामला?
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लेखपाल भर्ती प्रदेश की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक है
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हजारों प्रतियोगी छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा है
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आरक्षण नीति में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं
निष्कर्ष
लेखपाल भर्ती में आरक्षण संशोधन को लेकर बढ़ता विरोध सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार स्पष्टीकरण और श्वेतपत्र जारी करती है या नहीं, और यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।