PET कटऑफ व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रयागराज। प्रारंभिक अहर्ता परीक्षा (PET) में पूर्व घोषित और समान (कॉमन) कटऑफ तय किए जाने की मांग को लेकर PET अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत प्रतिवेदन भेजा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के अध्यक्ष और प्रदेश के मुख्य सचिव को भी पत्र भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि PET का उद्देश्य केवल योग्य उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा तक पहुंच देना है, न कि इसी स्तर पर अंतिम चयन करना।
अभ्यर्थियों की प्रमुख आपत्ति क्या है?
PET अभ्यर्थियों का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में:
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❌ कटऑफ पहले से तय नहीं होती
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❌ कटऑफ सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की जाती
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❌ हर भर्ती में अलग-अलग और मनमानी कटऑफ लगाई जाती है
इससे परीक्षा की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फीस भरने के बाद भी बाहर, अभ्यर्थियों को नुकसान
प्रतिवेदन में बताया गया है कि:
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स्पष्ट पात्रता मानक के अभाव में अभ्यर्थी आवेदन शुल्क और परीक्षा शुल्क जमा करते हैं
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बाद में ऊंची कटऑफ के कारण प्रारंभिक चरण में ही बाहर कर दिए जाते हैं
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कई मामलों में मुख्य परीक्षा की फीस जमा करने के बाद भी अभ्यर्थियों को अपात्र घोषित कर दिया जाता है
इस प्रक्रिया से अभ्यर्थियों को:
⚠️ समय की बर्बादी
⚠️ आर्थिक नुकसान
⚠️ मानसिक तनाव
का सामना करना पड़ता है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें
PET अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि:
✔️ PET की कटऑफ पहले से निर्धारित और घोषित की जाए
✔️ सभी भर्तियों के लिए समान (कॉमन) कटऑफ लागू हो
✔️ पात्रता नियमों में स्पष्टता और पारदर्शिता लाई जाए
✔️ अभ्यर्थियों के समय और धन की बर्बादी रोकी जाए
PET का असली उद्देश्य क्या होना चाहिए?
अभ्यर्थियों का कहना है कि PET का मकसद:
“योग्य उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए छांटना है,
न कि कटऑफ के जरिए उन्हें बाहर करना।”
यदि PET ही चयन का साधन बन जाएगी, तो इसका मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
क्यों अहम है यह मुद्दा?
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PET के जरिए लाखों युवा विभिन्न सरकारी भर्तियों की तैयारी करते हैं
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पारदर्शी कटऑफ से विश्वास बढ़ेगा
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मनमानी व्यवस्था से छात्र आंदोलन और कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं
निष्कर्ष
PET कटऑफ को लेकर उठी यह मांग सरकार और आयोग के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते स्पष्ट और समान कटऑफ नीति लागू नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह मामला बड़े आंदोलन या न्यायिक हस्तक्षेप की ओर बढ़ सकता है।