स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पर बड़ा सवाल | UP News
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में एक बार फिर शिक्षकों की BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ड्यूटी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—
👉 जब शिक्षक चुनावी कार्यों में व्यस्त रहेंगे, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे चलेगी?
प्रदेश के हजारों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
📌 क्या है पूरा मामला?
🔹 चुनावी तैयारियों के तहत बड़ी संख्या में शिक्षक BLO ड्यूटी में लगाए गए
🔹 कई विद्यालयों में पहले से ही 1–2 शिक्षक ही तैनात
🔹 BLO ड्यूटी के कारण स्कूलों में पढ़ाई ठप होने की स्थिति
🔹 अभिभावकों में नाराजगी, बच्चों का भविष्य दांव पर
🧒 बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर
विशेषज्ञों और शिक्षक संगठनों का कहना है कि—
➡️ कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की नींव कमजोर हो रही है
➡️ पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा
➡️ परीक्षा और मूल्यांकन प्रभावित हो रहे
➡️ RTE और NIPUN Bharat जैसे अभियान केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं
🗣️ शिक्षक संगठनों की नाराजगी
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि—
“शिक्षक पढ़ाने के लिए नियुक्त होते हैं, न कि हर समय चुनावी और प्रशासनिक कार्यों के लिए।”
उनका कहना है कि यदि गैर-शैक्षणिक कार्य अनिवार्य हैं, तो—
✔️ वैकल्पिक व्यवस्था की जाए
✔️ अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाए
✔️ एक ही शिक्षक पर बार-बार ड्यूटी का बोझ न डाला जाए
⚖️ पहले भी आ चुके हैं निर्देश
यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा उठा हो।
पूर्व में भी—
📜 हाईकोर्ट
📜 शिक्षा विभाग
📜 मानव संसाधन विकास मंत्रालय
द्वारा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी वही हैं।
🎯 बड़ा सवाल: समाधान क्या?
🔍 क्या BLO कार्य के लिए अलग कैडर बने?
🔍 क्या डिजिटल माध्यम से यह काम संभव है?
🔍 क्या शिक्षा को प्राथमिकता मिलेगी या चुनावी ड्यूटी हावी रहेगी?
इन सवालों के जवाब सरकार और प्रशासन को देने होंगे।