📢 जनगणना, ग्रीष्म अवकाश और अध्यापकों की तैनाती से जुड़ी अहम जानकारी
राज्य में आगामी अवधि को लेकर जनगणना और ग्रीष्म अवकाश से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यक्रम तय कर दिए गए हैं, जिसका सीधा असर विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, विशेषकर अन्य जनपदों में कार्यरत अध्यापक–अध्यापिकाओं पर पड़ेगा।
🧮 जनगणना का प्रथम चरण
सरकार द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार जनगणना का प्रथम चरण 20 मई से 20 जून तक आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों और शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा सकती है, जिससे शैक्षिक एवं अवकाश व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।
🌞 ग्रीष्म अवकाश की अवधि
इस वर्ष ग्रीष्म अवकाश 20 मई से 14 जून तक निर्धारित किया गया है। यानी ग्रीष्म अवकाश की अवधि जनगणना के प्रथम चरण से आंशिक रूप से मेल खा रही है, जिससे अवकाश के दौरान भी कई शिक्षकों को प्रशासनिक दायित्व निभाने पड़ सकते हैं।
👩🏫 दूसरे जनपद में तैनात शिक्षकों के लिए स्थिति
दूसरे जनपदों में कार्यरत अध्यापक एवं अध्यापिकाओं के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे शिक्षक इस बार शीत अवकाश के बाद अगले शीत अवकाश तक ही अपने गृह जनपद लौट पाएंगे।
अर्थात् वर्तमान व्यवस्था में ग्रीष्म अवकाश के दौरान घर जाना संभव नहीं होगा, जिससे पारिवारिक और मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
⚠️ चिंताएं और अपेक्षाएं
- अवकाश के दौरान भी जनगणना ड्यूटी से शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ
- अन्य जनपदों में तैनात शिक्षकों के पारिवारिक जीवन पर प्रभाव
- स्पष्ट एवं मानवीय प्रशासनिक निर्णय की आवश्यकता
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जनगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है, लेकिन इसके साथ-साथ शिक्षकों की पारिवारिक और मानसिक परिस्थितियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह स्पष्ट दिशानिर्देश, यथासंभव राहत और संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक—दोनों प्रभावित न हों।
