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🔴 बेसिक शिक्षा: स्कूलों में उत्सव मनाइए, बजट नहीं — जेब पर भरोसा कीजिए!

❗ शिक्षकों से कार्यक्रम, खर्च अपनी जेब से?

UP Basic Education News 2026

प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में एक बार फिर ऐसा निर्देश सामने आया है, जिसने शिक्षकों को असमंजस में डाल दिया है।
कहा जा रहा है—
👉 “स्कूलों में उत्सव तो मनाइए, लेकिन बजट की उम्मीद मत कीजिए।”

यानी आयोजन ज़रूरी है, पर खर्च के लिए अपनी जेब पर भरोसा करें।


🎉 उत्सव अनिवार्य, लेकिन फंड गायब!

  • विभिन्न शैक्षिक, सांस्कृतिक और सरकारी कार्यक्रम मनाने के निर्देश

  • फोटो, रिपोर्ट और अपलोडिंग अनिवार्य

  • लेकिन—
    ❌ अलग से कोई बजट स्वीकृत नहीं
    ❌ कम्पोजिट ग्रांट पहले ही सीमित

परिणाम यह कि—
👉 शिक्षकों को निजी खर्च से कार्यक्रम कराने पड़ रहे हैं


👩‍🏫 शिक्षकों की नाराजगी क्यों?

  • पहले ही स्टेशनरी, प्रिंटिंग, सजावट में खुद का पैसा

  • अब उत्सव, पोस्टर, बैनर, रंगोली, माइक तक

  • सवाल यह है—

क्या बेसिक शिक्षा अब “जेब आधारित व्यवस्था” बनती जा रही है?


⚠️ जमीनी हकीकत

  • ग्रामीण स्कूलों में संसाधनों की भारी कमी

  • एक शिक्षक पर कई जिम्मेदारियाँ

  • ऊपर से कार्यक्रमों का दबाव

  • फंड न हो तो भी आयोजन अनिवार्य

यह स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता से ज़्यादा
👉 दिखावे और औपचारिकताओं पर ज़ोर देती दिख रही है।


📢 शिक्षक संगठनों की मांग

  • बिना बजट कोई अतिरिक्त कार्यक्रम न थोपा जाए

  • कम्पोजिट ग्रांट को यथार्थ के अनुसार बढ़ाया जाए

  • शिक्षकों से व्यक्तिगत खर्च की अपेक्षा समाप्त हो

  • शिक्षा को उत्सव नहीं, व्यवस्था के रूप में देखा जाए


🔥 क्यों यह खबर Google Discover के लिए Perfect है?

✅ भावनात्मक और जमीनी मुद्दा
✅ तीखी, सवाल उठाने वाली हेडलाइन
✅ शिक्षक समुदाय से सीधा जुड़ाव
✅ मोबाइल यूज़र के लिए शॉर्ट पैराग्राफ
✅ “जेब पर भरोसा” जैसे स्ट्रॉन्ग शब्द


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