Leaderboard Ad – Below Nav

Ad – Above Posts (Multiplex/Display)

Ad – Between Posts Section

वाराणसी में शिक्षकों का जोरदार विरोध: अनुचित स्थानांतरण और समायोजन पर हंगामा

 वाराणसी में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा हाल ही में किए गए विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश शिक्षक स्थानांतरण नीति और समायोजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से जारी नवीनतम समायोजन आदेशों को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है, खासकर शहरी क्षेत्र में कार्यरत अध्यापकों के बीच।

शिक्षकों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षक समायोजन प्रक्रिया में न तो वरिष्ठता सूची का सही पालन किया गया और न ही मानवीय आधारों को महत्व दिया गया। कई अध्यापकों को 15 से 20 किलोमीटर दूर ग्रामीण विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे उनकी पारिवारिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। महिला शिक्षकों और दिव्यांग शिक्षकों के मामलों में निर्धारित छूट और सहूलियतों को भी अनदेखा किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

शिक्षक संगठनों के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जबरन डाटा अपडेट कराकर समायोजन की प्रक्रिया पूरी कराई गई, जबकि नियमों के अनुसार यह प्रक्रिया स्वैच्छिक और विकल्प आधारित होनी चाहिए थी। पारदर्शिता की कमी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में बड़ी संख्या में शिक्षक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग से मांग की कि जारी की गई समायोजन सूची की पुनः समीक्षा की जाए और त्रुटिपूर्ण स्थानांतरण आदेशों को तत्काल निरस्त किया जाए। शिक्षक नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती, शिक्षक स्थानांतरण नियम, सरप्लस शिक्षक समायोजन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पहले से ही सुर्खियों में है। वाराणसी शिक्षक आंदोलन यह दर्शाता है कि यदि नीति निर्माण और क्रियान्वयन के बीच का अंतर समाप्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

UPTET news