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वर्ष 2010 में भी हुईं थीं फर्जी शिक्षकों की नियुक्तियां

जागरण संवाददाता, कासगंज: बेसिक शिक्षा विभाग में एक नया कारनामा फिर सामने आया है। वर्ष 2010 में भी आधा दर्जन फर्जी शिक्षकों की नियुक्तियां की गईं। तत्कालीन डायट प्राचार्य ने जालसाजों के विरुद्ध एफआईआर की संस्तुति की, लेकिन शिक्षा विभाग के माफिया यह पत्रावली दबा गए। अब जिला प्रशासन नए सिरे से जांच शुरू कराएगा।

बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षा माफिया विभाग को घुन लगा गए। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रघुवीर ¨सह ने जिले में फर्जी शिक्षकों की नियुक्तियों की। वर्ष 2011 में आधा दर्जन शिक्षको को फर्जी तरीके से नियुक्ति दी गई। इस मामले में वर्तमान जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने शिक्षकों पर एफआईआर कराई और बेसिक शिक्षा विभाग के एक बाबू को निलंबित किया। उसके बाद यह जांच ठंडे बस्ते में चली गई। लेकिन एक और मामला इस बीच गरमा गया। वर्ष 2010 में भी आधा दर्जन शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियां हुईं थीं। इन सभी शिक्षकों को सिढ़पुरा क्षेत्र में नियुक्त किया गया। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रघुवीर ¨सह ने संबंधित पटल के बाबू को पत्रावली जमा कराते हुए उन्हें नियुक्ति दी। पटल बाबू ने स्वयं और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर से पदस्थापना भी कराई। जब तत्कालीन डायट प्राचार्य डॉ. शिवकुमारी राव ने इनके दस्तावेजों की जांच कराई तो सभी के दस्तावेज फर्जी पाए गए। उसके बाद तत्कालीन डायट प्राचार्य ने इन फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध एफआईआर के आदेश दिए, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब मामला सामने आया तो जिला प्रशासन नए सिरे से मामले की जांच शुरू करा रहा है। जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि वह मामले की जांच कराएंगे और जानकारी जुटाएंगे।
इन फर्जी शिक्षकों को मिली तैनाती
मिथलेश कुमार पुत्र जोहरीलाल को सिढ़पुरा के गांव नौरी में, जयवर्धन पुत्र इंद्रदेव को सोरों के गांव नगला लोधी में, अनिल कुमार पुत्र रामप्रकाश को अमांपुर के गांव नगला पोपी में, सीमा ¨सह पुत्री सूर्यकेश को सिढ़पुरा के ग्राम उतरना, विनोद कुमार पुत्र श्यामले को गंजडुंडवारा के गांव सिकंदरपुर खुर्द के प्राथमिक विद्यालय में तैनाती दी गई।
उच्चाधिकारियों से की शिकायत
नगर के सोरों गेट निवासी रामनिवास पुत्र डालचंद्र ने जब मामले की शिकायत बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव, जिलाधिकारी सहित उच्चाधिकारियों से की, तब फर्जी प्रमाण पत्रों से नौकरी करने वाले शिक्षकों की असलियत सामने आई है।

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