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यूपी में क्यों न लगा दिया जाए राष्ट्रपति शासन, मुख्य सचिव तलब, कहा-नौकरशाही सरकार के काबू में नहीं

पारिवारिक कलह से जूझ रही सपा सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से भी मंगलवार को तगड़ा झटका लगा। अदालत ने डेंगू से हो रही मौतों के मद्देनजर सरकारी प्रयासों को नाकाफी मानते हुए सरकार से पूछा कि क्यों न प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी जाए।
मुख्य सचिव राहुल भटनागर को गुरुवार को तलब करते हुए अदालत ने कहा कि नौकरशाही सरकार के काबू में नहीं है।
1डेंगू नियंत्रण में प्रशासनिक विफलता की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एपी शाही और न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार का सांविधानिक तंत्र स्थिति को संभालने में पूरी तरह विफल रहा है। न्यायालय ने कहा कि सरकार नागरिकों को स्वास्थ्य व सफाई उपलब्ध कराने के अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रही है। न्यायालय ने कहा, मुख्य सचिव स्पष्ट करें कि इस स्थिति को तत्काल कैसे ठीक कर सकते हैं अन्यथा कानून व शासन के समुचित प्रशासन के लिए न्यायालय संविधान के संबंधित प्रावधानों को लागू कर सकता है। बहस के दौरान न्यायालय ने आम लोगों की मौतों और सरकारी तंत्र की लापरवाही पर कहा कि क्यों न संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा कर दी जाए। 1राज्य में आपातस्थिति : नाराज हाईकोर्ट ने कहा कि यह दशा स्पष्ट इशारा करती है कि राज्य में आपात स्थिति है और सरकार की मशीनरी पूरी तरह विफल हुई है।

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