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अब कैसे भरे जाएंगे तीन हजार शिक्षकों के पद, शिक्षक बनने के अर्ह युवाओं का टीईटी-2011 का प्रमाणपत्र अब वैध नहीं

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान-गणित शिक्षक के तीन हजार पद खाली हैं, लेकिन अब इन पदों पर काबिज होने का दावेदार कोई नहीं है। वजह यह है कि शिक्षक बनने के अर्ह युवाओं का टीईटी-2011 का प्रमाणपत्र अब वैध नहीं रहा।
विभागीय अफसरों की अनदेखी से बड़ी संख्या में युवाओं के हाथ से मौका फिसल गया है। अब यह पद कैसे भरे जाएंगे इसका वाजिब जवाब भी किसी के पास नहीं है। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में इधर के वर्षो में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्तियां हुई हैं। इससे सभी वाकिफ हैं, वहीं इसे भी झुठलाया नहीं जा सकता कि प्रदेश के लाखों युवाओं को भर्ती में मौका न मिलने से निराश भी होना पड़ रहा है। सैकड़ों युवा न्यायालयों में याचिका दायर करने के बाद न्याय मिलने की उम्मीद में दौड़ लगा रहे हैं। वहीं दावेदारों के एक बड़े वर्ग को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब उनकी अर्हता का अहम प्रमाणपत्र टीईटी-2011 की वैधता खत्म हो गई। तमाम भर्तियों में दावेदार बने युवा एक ही झटके में रेस से बाहर हो गए हैं। प्रदेश के उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान-गणित 29334 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। सात चरणों की काउंसिलिंग में बड़ी संख्या में पद भी भरे गए, लेकिन अब भी करीब तीन हजार से अधिक सीटें खाली हैं। युवाओं को उम्मीद थी कि इन पदों पर शिक्षक बनने का उन्हें मौका मिलेगा, लेकिन आखिरकार उम्मीद टूट गई है। 1इस भर्ती की तमाम विसंगतियों को लेकर उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, कुछ दिन पहले ही कोर्ट ने विभागीय अफसरों से खाली सीटें भरने के लिए आठवीं काउंसिलिंग कराने को दो माह का वक्त दिया गया है। इस पर फैसला होने से पहले ही युवा अर्हता प्रमाणपत्र के चलते बाहर हो गए हैं। अब यह पद कैसे भरे जाएंगे, इस संबंध में विभागीय अफसर कुछ कहने को तैयार नहीं है।
सुनवाई के याचियों को मिले लाभ : शिक्षक पात्रता परीक्षा 2011 के तमाम अभ्यर्थी भर्ती में विसंगतियों को लेकर न्यायालय में याचिका दायर किए हैं। युवाओं का कहना है कि उनका प्रमाणपत्र भले ही आज से अवैध हो गया है, लेकिन यदि निर्णय उनके पक्ष में आता है तो इसी प्रमाणपत्र को आधार मानते हुए लाभ दिया जाए। कोर्ट में याची बने युवाओं की तादाद काफी अधिक है।

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