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UPTET: यूपीटीईटी का प्रमाणपत्र आजीवन मान्य करने की तैयारी, शीर्ष कोर्ट भी दे चुका आदेश व हाईकोर्ट में हलफनामा बनेगा बड़ा आधार

 उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) 2020 का प्रमाणपत्र आजीवन मान्य हो सकता है। परीक्षा संस्था इसका प्रस्ताव शासन को भेजेगा, मंजूरी मिली तो शिक्षक बनने के दावेदारों को बार-बार पात्रता परीक्षा देने से मुक्ति मिल जाएगी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय उप्र प्रयागराज इन दिनों परीक्षा का प्रस्ताव तैयार कर रहा है और दिसंबर माह से आनलाइन आवेदन लिए जाने की तैयारी है। इम्तिहान फरवरी के अंतिम सप्ताह में कराया जाएगा।



प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए दावेदारों को राज्य या फिर केंद्र सरकार की कराई जाने वाली पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। प्रदेश सरकार यह इम्तिहान हर वर्ष में एक बार जबकि केंद्र सरकार दो बार कराता आ रहा है। हालांकि इस बार पांच जुलाई को होने वाला इम्तिहान 31 जनवरी को हो रहा है। प्रदेश सरकार ने भी शिक्षक पात्रता कराने को मंजूरी दी है और परीक्षा संस्था से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है।

परीक्षा के नियम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई भी तय करता रहा है। 29 सिंतबर 2020 को एनसीटीई ने 50वीं आमसभा में टीईटी का प्रमाणपत्र आजीवन वैध करने का प्रस्ताव पारित किया। एनसीटीई की ओर से 13 अक्टूबर को जारी मिनट्स में कहा गया है कि आगे से होने वाली सीटीईटी की वैधता आजीवन रहेगी।

इससे प्रदेश के बेरोजगार युवा भी इस नियम को लागू करने की उम्मीद संजोए हैं, क्योंकि इस निर्णय का उन्हें सबसे अधिक लाभ होगा।

दो स्तर की होती है परीक्षा
शिक्षक पात्रता परीक्षा दो स्तर प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर की होती है। दोनों परीक्षाएं एक ही दिन दो पालियों में कराई जानी हैं। इस बार भी करीब 15 लाख से अधिक आवेदन होने के आसार हैं।

शीर्ष कोर्ट भी दे चुका आदेश
69000 शिक्षक भर्ती में शीर्ष कोर्ट ने शिक्षामित्रों को नई शिक्षक भर्ती में एक और अवसर देने का आदेश दिया है। इससे तय है कि नई भर्ती नए साल में आएगी। पदों की संख्या अभी तय नहीं है। वहीं, परीक्षा नियामक कार्यालय के अनुसार यूपीटीईटी में इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा और अनुमति मिलने पर यहां का प्रमाणपत्र भी आजीवन वैध हो जाएगा।

हाईकोर्ट में हलफनामा बड़ा आधार
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दिया गया था कि एनसीटीई के नियम प्रदेश में भी लागू होंगे। इससे प्रमाणपत्र आजीवन मान्य होने की उम्मीद अधिक है।

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