Rajasthan Judicial Recruitment | SC Judgment 2026 | Reserved Category Candidates | High CPC Keywords
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, जो जनरल/ओपन कैटेगरी की कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करते हैं, उन्हें ओपन कैटेगरी में ही शॉर्टलिस्ट किया जाना चाहिए। यह फैसला 2,756 जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है।
🔹 मामला क्या था?
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अगस्त 2022 में राजस्थान हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया शुरू की।
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लिखित परीक्षा 300 अंकों की और कंप्यूटर आधारित टाइपिंग टेस्ट 100 अंकों की थी।
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आरक्षित श्रेणियों (SC, OBC, MBC, EWS) की कट-ऑफ जनरल कैटेगरी से अधिक थी।
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इस कारण कई आरक्षित उम्मीदवार, जिन्होंने जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ पार की, लेकिन अपनी आरक्षित श्रेणी की कट-ऑफ से कम अंक लाए, शॉर्टलिस्ट नहीं हो पाए।
🔹 राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश
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आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार जो जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ से ऊपर अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें ओपन कैटेगरी में शामिल किया जाए।
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ओपन/जनरल कैटेगरी की मेरिट सूची योग्यता के आधार पर तैयार की जाए।
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जो उम्मीदवार पहले ही ओपन कैटेगरी में चयनित हैं, उन्हें आरक्षित सूची से बाहर रखा जाए।
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गलत तरीके से बाहर किए गए उम्मीदवारों को टाइपिंग टेस्ट में शामिल होने का अवसर दिया जाए।
🔹 सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
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अपीलकर्ताओं की दलील कि इससे आरक्षित वर्ग को “डबल बेनिफिट” मिलेगा, खारिज कर दी।
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ओपन/जनरल कैटेगरी सभी के लिए खुली मेरिट होती है, किसी जाति या वर्ग के लिए आरक्षित नहीं।
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आवेदन में आरक्षित श्रेणी का उल्लेख किसी को स्वतः आरक्षित पद पर नियुक्ति का अधिकार नहीं देता।
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उच्च मेरिट हासिल करने वाले आरक्षित उम्मीदवारों को केवल जाति या श्रेणी के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला सही ठहराया और सभी अपीलें खारिज कीं।
🔹 फैसले का महत्व
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भर्ती प्रक्रियाओं में मेरिट को सर्वोपरि मानने का संदेश।
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संवैधानिक समानता के सिद्धांत (Article 14 & 16) को मजबूत करना।
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आरक्षित वर्ग के योग्य उम्मीदवारों के अधिकार सुरक्षित।