EPFO Salary Limit Increase | Supreme Court Order on EPF | Provident Fund Coverage India | Social Security for Employees
नई दिल्ली।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह EPFO योजना के तहत वेतन सीमा बढ़ाने पर चार माह के भीतर निर्णय ले।
कोर्ट को बताया गया कि EPFO की वर्तमान वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह पिछले 11 वर्षों से नहीं बदली गई है, जबकि न्यूनतम वेतन, महंगाई और प्रति व्यक्ति आय में कई गुना वृद्धि हो चुकी है।
⚖️ 11 साल से नहीं बदली EPFO की वेतन सीमा
यह आदेश सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि—
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EPFO वेतन सीमा में लंबे समय से बदलाव नहीं हुआ
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इससे संगठित क्षेत्र के लाखों कर्मचारी EPF कवरेज से बाहर हो गए हैं
याचिका में कहा गया है कि ₹15,000 से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी EPF सामाजिक सुरक्षा से वंचित रह जाते हैं।
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📉 सिफारिशें हुईं, लेकिन अमल नहीं
याचिका में यह भी कहा गया कि—
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16वीं लोकसभा की लोक लेखा समिति (PAC)
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EPFO की सब-कमेटी (2022)
दोनों ने वेतन सीमा को समय-समय पर संशोधित करने की सिफारिश की थी।
हालांकि—
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जुलाई 2022 में सेंट्रल बोर्ड से मंजूरी मिलने के बावजूद
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केंद्र सरकार ने अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पिछले 70 वर्षों में EPFO वेतन सीमा में बदलाव न तो नियमित रहा, न ही किसी तय मानक पर आधारित।
💬 न्यूनतम वेतन से भी कम है EPFO की सीमा
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने अदालत को बताया कि—
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कई राज्यों और केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन ₹15,000 से अधिक है
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इसके बावजूद EPFO की सीमा वहीं अटकी हुई है
इसका नतीजा यह हुआ कि—
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अधिकांश कर्मचारी EPF, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से बाहर हो गए
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यह स्थिति सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य के खिलाफ है
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📊 अनियमित तरीके से बदली जाती रही वेतन सीमा
याचिका में यह भी कहा गया कि—
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कभी 13–14 साल बाद अचानक वेतन सीमा बढ़ाई गई
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महंगाई, CPI, न्यूनतम वेतन, प्रति व्यक्ति आय जैसे संकेतकों पर ध्यान नहीं दिया गया
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कोई स्थायी समयसीमा या फार्मूला तय नहीं किया गया
इस कारण संगठित क्षेत्र के बड़े हिस्से को EPFO सुरक्षा से बाहर रखा गया।
🔎 सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि—
“EPFO जैसी सामाजिक सुरक्षा योजना को समय के अनुरूप अपडेट करना जरूरी है।”
अब केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर वेतन सीमा बढ़ाने या न बढ़ाने पर स्पष्ट निर्णय लेना होगा।
📌 क्यों अहम है EPFO वेतन सीमा बढ़ाना?
✔️ करोड़ों कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा
✔️ PF, पेंशन और बीमा का लाभ
✔️ संगठित क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता
✔️ रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित भविष्य
📝 निष्कर्ष
EPFO वेतन सीमा बढ़ाने का मामला अब केवल नीतिगत नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब नजरें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं। यदि वेतन सीमा बढ़ती है, तो यह देश के लाखों कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक राहत साबित होगी।