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निजी स्कूलों को अनुदान देना सरकार की नीति का विषय, अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती: हाईकोर्ट

 प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूलों को अनुदान देना राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसमें न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने कहा कि अनुदान प्राप्त करना किसी शैक्षणिक संस्था का मौलिक अधिकार नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए निजी स्कूलों को अनिवार्य रूप से अनुदान देना सरकार पर बाध्यकारी नहीं है। कोर्ट ने शिक्षकों को वेतन भुगतान का निर्देश देने से भी इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि स्कूलों को अनुदान देने या न देने का फैसला सरकार की नीति पर निर्भर करता है। ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन का लाभ मिल सकता है, जिनकी नियुक्ति निर्धारित योग्यता और प्रक्रिया के अनुसार की गई हो। इस फैसले से प्रदेश के कई निजी विद्यालयों से जुड़े मामलों में स्थिति स्पष्ट हो गई है।

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