शिक्षकों ने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के निर्णय के बाद देश के सभी राज्यों में अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के साथ अन्याय है। गुरुवार को इसी मांग को लेकर शिक्षकों ने दोपहर बाद बेसिक शिक्षा कार्यालय पर धरना दिया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम सुशांत सांवरे को कलक्ट्रेट जाकर सौंपा है।
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परिषदीय विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट की मांग
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व परिषदीय विद्यालयों में तैनात किए गए शिक्षकों टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है। गुरूवार की शाम शिक्षकों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा है। गुरूवार की शाम कलक्ट्रेट में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 को 27 जुलाई 2011 से लागू किया गया था। अधिनियम लागू होने के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया। जबकि उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से मुक्त रखा गया था।
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