लखनऊ: प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सेवा सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट नियम न होने के कारण शिक्षकों के उत्पीड़न के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ
(पांडेय गुट) ने गहरी नाराजगी जताई है और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।शिक्षक संघ ने उठाई यह मांग
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह पटेल और प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने विभागीय अधिकारियों से कहा है कि शिक्षकों को पर्याप्त कानूनी संरक्षण दिया जाए।
उनका कहना है कि सेवा सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट नियम न होने के कारण कई शिक्षक प्रशासनिक दबाव और अन्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
शिक्षा सेवा आयोग में धारा 21 शामिल करने की मांग
शिक्षक संघ ने नए बनने वाले उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग में पूर्व धारा 21 को फिर से शामिल करने की मांग उठाई है।
संघ का कहना है कि इस प्रावधान को शामिल करने से:
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शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे
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उन्हें विधिक संरक्षण मिलेगा
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विद्यालयों में मनमानी और उत्पीड़न की घटनाएं कम होंगी
शिक्षकों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार जब तक शिक्षकों की सेवा शर्तें स्पष्ट और सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक शिक्षकों के बीच असुरक्षा की भावना बनी रहेगी।
इसलिए संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द स्पष्ट नियम लागू करने की मांग की है।
FAQ (SEO Boost)
प्रश्न: किस संगठन ने शिक्षकों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है?
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने यह मुद्दा उठाया है।
प्रश्न: शिक्षक संघ ने क्या मांग की है?
नए शिक्षा सेवा आयोग में पूर्व धारा 21 को फिर से शामिल करने की मांग की है।
प्रश्न: समस्या क्या बताई जा रही है?
अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के स्पष्ट नियम न होने से उत्पीड़न के आरोप सामने आ रहे हैं।
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