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02 Dec 2015 : वीडियो जिसमें बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या जी शिक्षामित्रों के विरोध में सदन में कैसे अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं

आप सभी ए वीडियो देखें । जिसमें बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या जी शिक्षामित्रों के विरोध में सदन में कैसे अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं । पता नहीं शिक्षामित्र इनका क्या बिगाड़ा है ?
ए है बीजेपी का चाल चरित्र चेहरा , जो समायोजित शिक्षामित्रों का विरोध सदन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या जी चिल्ला चिल्लाकर कर बोल रहे हैं । जबकि ए शिक्षामित्र इन्ही की अवैध संतान की तरह है । प्रदेश में इन्ही के कार्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री मा0 कल्याण सिंह द्वारा प्राथमिक विद्यालयों में गिरते शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए छात्र शिक्षक के अनुपात में 2001 में 2250 रू0 के मानदेय पर रखा गया । प्रदेश के समस्त सरकारी प्राथमिक स्कूल समय से खूलने लगे । शिक्षा की गुणवत्ता व बच्चे बढ़ गए । इसके लिए प्रदेश स्तर पर शिक्षामित्रों के कार्य को सराह गया । 15 साल बाद अगर स्थाई शिक्षक हो गये तो इनके उपर कौन सा पहाड़ टूट गया ? इतना पेट में मरोड़ क्यूं । उस दौरान ए बीएड धारी कहां थे ? यही हो गये होते शिक्षामित्र । इनको तो उस समय वेटेज भी मिल रहा था ।जब तक कम पैसे में पढ़ाए तबतक सब सही था, स्थाई होते ही सब गलत हो गया । जिस टेट 2011 की बात हो रही है उसमें धांधली जोरों पर हुआ था और जांचोपरांत एक अधिकारी की जेल हुई ।सफेदा लगा - लगाकर नं0 बढ़ाया गया । आज उस पात्रता परीक्षा की इतनी तारीफ़ ? जो पंद्रह साल से लगातार विद्यालय में गरीब ,मज़दूर ,मजलूम सीधे - सादे परिवार के बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराया ओ अयोग्य हो गया ? बेकार हो गया ? जबकि सबको पता है कि शिक्षामित्र भी शिक्षक बनने की योग्यता हासिल कर ली है । स्नातक , परस्नातक के साथ ही दूरस्थ शिक्षाविधि से बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है ।कुछ टेट कुछ सीटेट तो कुछ नेट भी पास हैं । और ए महोदय शिक्षामित्रों का विरोध कर रहे हैं । कैसे आप पर भरोसा किया जाय की आपकी सरकार बनेगी तो आप युवाओं को रोजगार दैंगे ।जो रोजगार मिला है उसको छिनने की बात करने वाला, उसका विरोध करने वाला शख्श, कभी शिक्षामित्र हितैशी नहीं हो सकता है । आज प्रदेश के शिक्षामित्रों को जागना होगा और बीजेपी का असली चाल चरित्र चेहरा पहचानना होगा । आने वाले विधान सभा चुनाव में इस सवाल और इस विरोध का जवाब शिक्षामित्र जरूर देगा ।
शिक्षामित्र एकता - ज़िंदाबाद !
जय शिक्षामित्र ।
आपका
बेचन सिंह
जिला मीडिया प्रभारी
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ गोरखपुर ।
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