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वित्तविहीन शिक्षक तेज करेंगे पूर्णकालिक दर्जा की मांग, 1100 रुपये का मानदेय मिलने से बढ़ी नाराजगी, चुनावी बेला में मुखर हुए वित्त विहीन शिक्षक

चुनावी बेला में वित्तविहीन शिक्षक अधिकार व सम्मान की मांग को लेकर प्रदेश सरकार के लिए मुश्किल खड़ी करने वाले हैं। सिर्फ आठ सौ से 11 सौ रुपये मानदेय मिलने से उनकी नाराजगी बढ़ गई है।
‘समान काम के लिए समान वेतनमान’ को लेकर सरकार की व्यापक घेराबंदी करने की तैयारी चल रही है, जिसमें दूसरे संगठन भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
अशासकीय स्ववित्तपोषित विद्यालय महासंघ अनिलराज मिश्र प्रधान महासचिव का कहना है कि बीते विधानसभा चुनाव में सपा ने हर वित्तविहीन शिक्षक को उचित मानदेय देने का वादा किया था। परंतु सत्ता मिलने पर मात्र 2010 नियुक्त शिक्षकों को ही मानदेय देने का शासनादेश जारी हुआ है। वहीं वित्तविहीन शिक्षकों को अंशकालिक का दर्जा दिया गया है, जो अनुचित है। शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों के लिए ‘समान काम के लिए समान वेतनमान’ की लड़ाई वह लड़ रहे हैं। वित्तविहीन शिक्षकों को पूर्णकालिक का दर्जा दिलाना, अप्रशिक्षितों को शिक्षामित्रों की तर्ज पर प्रशिक्षित कराना, मानदेय खातों में स्थानांतरित कराना उनका लक्ष्य है।
इसको लेकर बीते दिनों प्रमुख सचिव माध्यमिक से मिलकर मांग पत्र सौंप चुके हैं। अगर सारी मांगों का जल्द निस्तारण न हुआ तो आरपार की लड़ाई छेड़ी जाएगी। वित्त विहीन शिक्षकों के हित के लिए सड़क से शासन तक आवाज मुखर की जाएगी। जब तक उनको वाजिब हक नहीं मिलता है आंदोलन थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वित्तविहीन शिक्षकों की ओर सरकार ध्यान नहीं देती है तो आगामी विधान सभा चुनाव में उसको इस अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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