उर्दू अध्यापक के पद पर भर्ती शिक्षकों की जिस डिग्री का फर्जी होने का अंदेशा है उसी डिग्री का सत्यापन कराए बिना ही संबंधित शिक्षकों को वेतन भुगतान कर दिया गया।
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डिग्री का सत्यापन कराए बिना ही दे दिया वेतन
जौनपुर। उर्दू अध्यापक के पद पर नियुक्त शिक्षकों की संदिग्ध डिग्री का
सत्यापन कराए बिना ही उन्हें वेतन का भुगतान भी कर दिया गया। वर्ष 2016 में
प्राथमिक विद्यालयों में उर्दू अध्यापकों की भर्ती में हुए खेल में बेसिक
शिक्षा विभाग की भी मिली भगत सामने आई है।
उर्दू अध्यापक के पद पर भर्ती शिक्षकों की जिस डिग्री का फर्जी होने का अंदेशा है उसी डिग्री का सत्यापन कराए बिना ही संबंधित शिक्षकों को वेतन भुगतान कर दिया गया।
उर्दू अध्यापकों की भर्ती के लिए जामियां उर्दू अलीगढ़ विश्वविद्यालय से
जारी मोअल्लिम-ए-उर्दू की की 1997 से पहले की डिग्री को बीटीसी के समकक्ष
माना गया है। जिले में भर्ती कुल 42 शिक्षकों में से 34 लोगों की
मोअल्लिमें उर्दू और अदीबे कामिल की डिग्री को सत्यापन के लिए जामिया उर्दू
अलीगढ़ विश्वविद्यालय को भेजा गया है। आठ शिक्षक ऐसे हैं जिनकी मोअल्लिमें
उर्दू की डिग्री को सत्यापन के लिए संबंधित संस्थान को भेजा ही नहीं गया।
नियुक्त शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए निर्देश था कि शिक्षकों की किसी भी
दो डिग्री का सत्यापन होने पर उन्हें भुगतान किया जा सता है। बस इसी को
आधार मानकर हाईस्कूल और इंटर की डिग्री के सत्यापन रिपोर्ट पर ही उन्हें
वेतन का भुगतान कर दिया गया। जिन आठ लोगों की मोअल्लिमें उर्दू की डिग्री
का सत्यापन नहीं कराया गया है उसमें से एक को निलंबित किया जा चुका है जबकि
सात अभी भी वेतन ले रहे हैं। जामियां उर्दू अलीगढ़ से जिला बेसिक शिक्षा
अधिकारी कार्यालय को भेजी गई सत्यापन रिपोर्ट की कापी जन सूचना अधिकार
अधिनियम के तहत फारुक अहमद को मिली तो उन्होंने नियुक्त शिक्षकों की सूची
और सत्यापन रिपोर्ट की कापी जिलाधिकारी को सौंपी है। उनका आरोप है कि जिन
आठ शिक्षकों की मोअल्लिमें उर्दू की डिग्री का जिक्र सत्यापन रिपोर्ट में
नहीं है उन्हें बचाने में जिला बेशिक शिक्षा विभाग के कर्मचारी मदद कर रहे
हैं। उन्होंने एक महिला शिक्षक का फर्जी जाति प्रमाण पत्र होने का भी दावा
करते हुए जांच कराने की मांग की है। कहा है कि जो महिला पिछड़ी जाति का
प्रमाण पत्र लगाकर पिछड़ी जाति के कोटे में आरक्षण का लाभ लेते हुए शिक्षक
बन गई है उसके पिता सरकारी नौकरी में रहे। वह सामान्य जाति के हैं। जबकि
जाति हमेशा पिता से ली जाती है और जाति कभी बदल नहीं सकती। इस संबंध में
बीएसए डा. राजेंद्र सिंह का कहना है कि शिक्षकों के वेतन भुगतान से पहले
उनकी डिग्रियों की जांच पड़ताल के बाद ही वेतन का भुगतान किया गया है।
उर्दू अध्यापक के पद पर भर्ती शिक्षकों की जिस डिग्री का फर्जी होने का अंदेशा है उसी डिग्री का सत्यापन कराए बिना ही संबंधित शिक्षकों को वेतन भुगतान कर दिया गया।
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