सिद्धार्थनगर : बेसिक शिक्षा विभाग फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने का दावा कर
रहा है। यहां 38 फर्जी शिक्षकों के बर्खास्तगी के करीब माह भर पूरे होने
वाले हैं और विभाग के पास वक्त ही नहीं है मुकदमा दर्ज कराने के लिए।
हालांकि बेसिक शिक्षाधिकारी ने इसके लिए सभी खंड शिक्षाधिकारियों को तीसरा
रिमांइडर जारी कर दिया है। बावजूद इसके अभी तक मुकदमा दर्ज कराने के लिए
खंड शिक्षाधिकारी गण सामने नहीं आ रहे हैं। विभाग ने उन्हें चेतावनी दी है
कि इसके बाद भी यदि मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया तो उनके विरुद्ध शासन को
पत्र लिखा जाएगा।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ खंड शिक्षाधिकारियों ने अपरोक्ष रूप से कहा
कि विभाग द्वारा उन्हें मोहरा बनाया जा रहा है। मुकदमें के लिए वह क्यों
तहरीर दें। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि संबंधित शिक्षक खंड
शिक्षाधिकारियों के क्षेत्र में तैनात थे। ऐसे में मुकदमा दर्ज कराने की
जिम्मेदारी खंड शिक्षाधिकारियों की है। फिलहाल सवाल यह है कि 23 अगस्त से
पेंच जो भी हो, पर यहां अभी तक मुकदमा नहीं दर्ज हो पा रहा है। 38 के ओट
में रैकेट पूरी तरह सुरक्षित है। मामला लंबित होने के चक्कर में रैकेट कहीं
न कहीं अपना सुरक्षा कवच मजबूत कर रहा है। पिछले कई वर्षों से कई लोग
संदेह के घेरे में घेरे में हैं। यहां तक कि लिपिकीय संवर्ग भी इससे अछूता
नहीं है। जिले के एक लिपिक का ताना-बाना इतना मजबूत है कि स्थानांतरण
रुकवाना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। स्पष्ट है कि फर्जी शिक्षकों का
नेटवर्क कहीं न कहीं व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। अब तक मुकदमा दर्ज न होने
से कहीं न कहीं संकेत यही मिलता है कि वह व्यवस्था को प्रभावित कर रहे
हैं।
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क्या दस मिनट का भी समय नहीं विभाग के पास
बेसिक शिक्षा विभाग अपनी व्यस्तता दिखा रहा है। कभी काउंसि¨लग व चयनित
शिक्षकों के विद्यालय आवंटन की मजबूरी जताई गई। सवाल यह है कि माह बीतने के
करीब है क्या विभाग के 10 मिनट का भी वक्त नहीं कि 38 फर्जी शिक्षकों के
विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाए।
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बेसिक शिक्षा विभाग फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध तहरीर तो दें। मुकदमा
तभी कायम कराया जा सकता है। बिना तहरीर के मुकदमा कैसे कायम कराया जाए।
मुकदमा दर्ज होने के बाद ही पुलिस मामले की छानबीन करेगी।
डा.धर्मवीर ¨सह
पुलिस अधीक्षक
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सभी खंड शिक्षाधिकारियों को 25 अगस्त को ही मुकदमा दर्ज कराने का
निर्देश दिया गया था। इन्होंने मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया, इस संबंध में
स्पष्टीकरण मांगा गया है। इन्हें तीसरा रिमांइडर भी दिया जा चुका है। इसके
बाद भी यदि मुकदमा नहीं कराया गया तो इनके विरुद्ध शासन को पत्र लिखा
जाएगा।
राम¨सह
बेसिक शिक्षाधिकारी
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